पिनान. राजस्थान की लोक संस्कृति में रचा बसा 16 दिवसीय गणगौर उत्सव को लेकर इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं ईसर-गोरा-पार्वती की पूजा-अर्चना में लीन हैं।
महिलाएं व युवतियां अल सुबह उपवन से हरी घास के गूले की झारी सिर पर धारण कर ”गौर गौर गोमती ईशर पूजे पार्वती” आदि गीत गाते हुए पूजा स्थल पर पहुंचती है। जहां सामूहिक रूप से गणगौर का टीका टिमकी व पूजन कर दूब के गूलों से ”राजाजी म्हानै खेलन द्यो गणगौर, गणगौर माता खोल किवाडी, तेरे दरवाजे खड़ी पूजन वाडी….जैसे गीतों से गणगौर माता को रिझाती है।
कहानी सुनकर अखण्ड सुहाग की कामना की जाती है। इस अवसर पर मंजू बंसल, चीनू बंसल, सरोज बंसल, अनिता गर्ग, बबीता गर्ग, तारा बंसल, विधा गर्ग, दीपा बंसल, सुधा गर्ग आदि महिलाएं मौजूद रहीं।