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राजनीति की भेंट चढ़ गया राजगढ़ का सराय बाजार

लोगों के छिने आशियाने, पुनर्वास व रोजगार की चिंता

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राजनीति की भेंट चढ़ गया राजगढ़ का सराय बाजार

राजनीति की भेंट चढ़ गया राजगढ़ का सराय बाजार

अलवर/राजगढ़. मास्टर प्लान के नाम पर प्राचीन भवनों सहित करीब डेढ़ सौ दुकानों को ध्वस्त किए जाने के बाद कस्बे के सराय बाजार में पूरी तरह से वीरानी छाई हुई है। यह बाजार राजनीतिक द्वेषता की भेंट चढ़ गया। लोगों के सामने अब पुनर्वास और रोजगार की ङ्क्षचता सताने लगी है।
नगरपालिका व उपखण्ड प्रशासन की ओर से मास्टर प्लान के तहत राजगढ़ कस्बे के सराय बाजार में सौ वर्षों से अधिक समय से रह रहे लोगों का आरोप है कि उनके मकानों व दुकानों को मनमाने तरीके से तोडकऱ उनकी रोजी रोटी छीन ली। तीसरे दिन मंगलवार को भी कस्बे के सराय बाजार में पूरी तरह से वीरानी छाई रही। लोगों का कहना है अब उनका धन्धा कब शुरू हो पाएगा तथा तोड़े गए भवनों व दुकानों के लिए आर्थिक सहायता कौन उपलब्ध कराएगा व राजगार की वैकल्पिक व्यवस्था कब की जाएगी।
मलबा हटाने के बाद नाला खुदाई का कार्य
मास्टर प्लान 2031 के तहत निर्माण कार्य तोड़े जाने के बाद मंगलवार दोपहर 12 बजे गोल सर्किल व चिकित्सालय भवन के समीप बैरिकेट््स लगाकर आवागमन बंद कर दिया गया। इसके बाद एक एलएनटी व जेसीबी लगाकर ट्रैक्टर ट्रॉलियों में मलबा भरने के साथ ही सडक मार्ग के दोनों ओर नाला खुदाई का कार्य शुरू किया गया। इस मौके पर उपखण्ड अधिकारी केशव कुमार मीना व नगरपालिका के अधिषाषी अधिकारी डॉ. बनवारी लाल मीना व बडी संख्या में कार्मिक मौजूद रहे। इसी दौरान विद्युत वितरण निगम के कार्मिक बिजली व्यवस्था को सुचारू करने में लगे रहे।


नियम विरुद्ध कार्रवाई
प्रशासन ने राजगढ़ में नियम विरुद्ध दुकानें व मकान तोडऩे की कार्रवाई की वह ङ्क्षनदनीय है। मास्टर प्लान 2012 में बना था जबकि लोग सैकडों वर्षों से रह रहे हंै, जिनके पास वैध दस्तावेज हंै सबकी अनदेखी की गई है। इसमें रक्षक ही भक्षक बन बैठे, अब प्रशासन व सरकार से मांग है कि पीडि़तों को उचित मुआवजा व अन्यत्र बसाकर घावों पर मरहम लगाए, अन्यथा इसके लिए एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
-सूरजभान धानका, पूर्व विधायक राजगढ़