भू वैज्ञानिक दृष्टि से अर को समझने के लिए ऊँचाई नहीं, बल्कि चट्टानों की संरचना, आयु और निरं को आधार बनाया जाता है। अरावली की पहचान क्वार्टजाइट, फाइलाइट, शिस्ट ग्रेनाइट जैसी प्राचीन चट्टानों से होती है, जो कई स्थानों पर 50 मीटर, कह मीटर और कहीं सतह के समांतर ही दिखाई देती हैं। इसलिए अरावली के में 100 मीटर की ऊँचाई का पैमाना ही बेबुनियाद है। पारिस्थितिकी के स्त यह तर्क और भी अधिक खतरनाक हो जाता है। इस मौके पर जस्सू फौजी, अमित जाटव, सुरेन्द्र कुमार, हजारी सिंह आदि मौजूद रहे।