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रामलीला के प्रति समर्पित है कलाकार, पहले करते थे अभिनय अब संभाल रहे हैं पदों की जिम्मेदारी

अलवर. शहर में रामलीलाओं के आयोजन की परंपरा बहुत पुरानी है। रामलीला से जुडे़ कलाकारों में अभिनय के प्रति समर्पण इतना ज्यादा है कि अभिनय के लिए सरकारी सेवा में रहते हुए अवकाश लेकर आते रहे हैं। इतना ही नहीं आज भी वरिष्ठ कलाकार रामलीलाओं में अभिनय करने के साथ महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहे हैं।

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अलवर

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Jyoti Sharma

Oct 01, 2022

रामलीला के प्रति समर्पित है कलाकार, पहले करते थे अभिनय अब संभाल रहे हैं पदों की जिम्मेदारी

रामलीला के प्रति समर्पित है कलाकार, पहले करते थे अभिनय अब संभाल रहे हैं पदों की जिम्मेदारी

इतना ही नहीं आज भी वरिष्ठ कलाकार रामलीलाओं में अभिनय करने के साथ महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहे हैं। इसके साथ ही नए कलाकारों को अभिनय की बारीकियां भी सिखा रहे हैँ, इससे रामलीला की नई पीढ़ी तैयार हो रही है।

जब में आठ साल का था तब से ही रामलीला देखने जाता था । यह सन 1960 की बात है। तब रामलीला ही मनोरंजन का साधन थी, पूरा मोहल्ला रामलीला देखने एक साथ जाता था। मुझे रामलीला के पात्र पसंद आने लगे और मैंने भी रामलीला में अभिनय करना शुरू कर दिया। रामलीला में अनेक भूमिका निभाई है। दर्शकों का लगाव आज भी बना हुआ है, यह अच्छी बात है। शिक्षक के पद पर रहते हुए भी अवकाश लेकर रामलीला के लिए आता था। अब पिछले 30 सालों से डायरेक्टर का पद संभाल रहा हूं। इससे पहले असिस्टेंड डायरेक्टर रह चुका हूं।
हरिकिशन खत्री, डायरेक्टर, रामलीला क्लब तांगा स्टैंड

मैं पिछले पचास सालों से रामलीला से जुडा हुआ हूं। हम दारूकुटा मोहल्ले में रहते थे, सारे पडोसी मिलकर रामलीला देखने जाते थे। रामलीला शुरु करने वाले श्रीराम व मदनलाल भी हमारे मोहल्ले में रहते थे । इसलिए रामलीला के प्रति उत्साह ज्यादा था। बाद में रामलीला में अभिनय करने का मौका भी मिल गया। मैंने बंदर सेना से शुरुआत की बाद में राम लक्ष्मण सहित अन्य पात्र निभाए। अनेक बार महिला पात्र सीता व कैकयी का अभिनय भी किया। बीएसएसएनएल में नौकरी के दौरान मेरी डयूटी सुबह छह बजे होती थी, रात को देर तक रामलीला में अभिनय व अन्य जिम्मेदारी के बाद भी सुबह डयूटी पर समय पर आता था। आज सेवानिवृत्त होने के बाद भी जिम्मेदारी निभा रहा हूं।

जगदीश मनोचा, कोषाध्यक्ष, रामलीला क्लब तांगा स्टैंड
बचपन से ही संगीत से लगाव रहा है। रामलीला भी देखने जाता था। बालपन में भरत का सशक्त अभिनय करने का मौका मिला जो दर्शकों को बहुत पसंद आया। इसके बाद सरकारी नौकरी में चयन हो गया और यह अलवर से बाहर जाना पड़ा, लेकिन इसके बाद भी रामलीला के प्रदर्शन के प्रति इनका इतना लगाव रहा कि छुट्टी लेकर भी रामलीला में आता था। प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद संस्था में महामंत्री पद सेवा दे रहा हूं। व्यास पीठ पर बैठकर रामायण की चौपाइयां गाता हूं तो दर्शक मंत्रमुग्ध होकर रामायण की चौपाइयां सुनते हैं। कई वर्षों तक संस्था के महा निर्देशक पद पर रहा हूं।
महेश चंद शर्मा, महामंत्री, राजर्षि अभय समाज अलवर।

मुझे रामलीला के साथ- साथ भर्तृहरि नाटक में भी अभिनय करने का मौका मिला। इसके चलते आज मुझे पहचान भी मिली है। मैं पिछले बीस सालों से रंगमंच पर अभिनय कर रहा हूं। रावण के रूप में दर्शकों ने मेरे अभिनय को सराहा है। बिजली निगम में सेवा के दौरान एक महीने का अवकाश लेकर अभिनय करता था। मुझे भर्तृहरि नाटक में भर्तृहरि बनने का मौका मिला । इस रोल में भी दर्शकों ने मुझे बहुत पंसद किया
वर्तमान में जयपुर में सुपरीटेंडेंट इंजीनियर सिविल पद पर कार्यरत हूं और जयपुर से आकर भी अभिनय कर रहा हूं।

ललित मिश्रा, वरिष्ठ कलाकार राजर्षि अभय समाज
जब मैं मात्र 13 साल का था, तब से ही रामलीला से जुड़ गया। शुरु में 5 साल तक सीता का अभिनय भी किया। महिला पात्र का अभिनय करने के लिए कलाकार नहीं मिलते थे लेकिन मैने चुनौती लेकर यह पात्र निभाया । इसके बाद लक्ष्मण का अभिनय किया। भारतीय वायु सेना में जूनियर वारंट ऑफिसर पद पर सेवा के दौरान भी दो महीने अवकाश लेकर अभिनय के लिए आता था। संस्था में 10 साल डिप्टी डायरेक्टर रहने के साथ वेशभूषा निर्देशक व मंच निदेशक के पद पर काम किया। इस बार भी रामलीला में राजा जनक का किरदार निभाया है।
अमृत खत्री, उपमंत्री, राजर्षि अभय समाज, अलवर।