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अलवर: राज​र्षि के आंगन में महापाप, हजारों पेड़ों को सजा ए मौत, 250 बीघा जमीन पर काटे सैकड़ों साल पुराने पेड़

RR College Alwar में करीब 250 बीघा जमीन पर हजारों पेड़ काट दिए गए। जिससे हजारों पशु-पक्षी भी बेघर हो गए।

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अलवर

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Lubhavan Joshi

May 26, 2022

RR College Alwar: Thousand Of Trees Cut Down In Alwar

अलवर: राज​र्षि के आंगन में महापाप, हजारों पेड़ों को सजा ए मौत, 250 बीघा जमीन पर काटे सैकड़ों साल पुराने पेड़

अलवर. जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक राजर्षि कॉलेज इन दिनों वीरान सा दिखाई देता है, कारण है कि कुछ समय पहले ही यहां कई हजार हरे पेड़ों को सजाए मौत दी गई है।

कॉलेज परिसर में बड़ी संख्या में पुराने हरे पेड़, उन्हें जड़ से काट दिया गया। इससे कभी हरियाली की शान रहा राजर्षि कॉलेज इन दिनों उजड़ा चमन जैसा दिखाई पड़ता है।दो दशक पहले तक बड़ी संख्या में यहां लगे आम के पेड़ों की महक शहरवासियों को राजर्षि कॉलेज की कैरी की याद दिलाती रही।

राजर्षि कॉलेज परिसर की करीब 250 बीघा भवन रहित भूमि पर कई हजार पेड़ रहे हैं। स्थिति यह थी कि कॉलेज के मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश करते ही परिसर में दोनों ओर इतनी हरियाली नजर आती थी कि उसके अंदर घूमने वाले पशु व लोग सड़क से दिखाई नहीं पड़ पाते थे, लेकिन अब हरे पेड़ों की कटाई के बाद स्थिति यह है कि कॉलेज परिसर में प्रवेश करते ही दूर तक खाली जमीन व सीमा पर बनी दीवार साफ दिखाई पड़ती है। इतनी बड़ी संख्या में कॉलेज परिसर में हरे पेड़ कट गए, लेकिन ये हरे वृक्ष किसकी अनुमति से कटे, यह जबाव देने वाला कोई नहीं है।

जूली फ्लोरा के नाम पर काटने की चर्चा

राजर्षि कॉलेज परिसर में बड़ी संख्या में पुराने हरे पेड़ों की कटाई के पीछे चर्चा है कि यहां जूली फ्लोरा हटाने के नाम पर किसी व्यक्ति को करीब सवा छह लाख रुपए में ठेका दिया गया, लेकिन हकीकत में यह ठेका कॉलेज परिसर के दोनों ओर तथा भवन के पीछे की ओर जमीन पर खड़े पुराने हरे वृक्ष काटने का था। ठेकेदार ने इस जमीन से बड़ी संख्या में हरे पेड़ों को काट दिया, जबकि कई स्थानों पर जूली फ्लोरा अभी खड़ी दिखाई पड़ती है।

कॉलेज चलने तक जमीन शिक्षा विभाग की

अलवर के इतिहास के जानकारों का कहना है कि आजादी के बाद सरकार की ओर से की गई इंवेट्री में राजर्षि कॉलेज चलने तक सम्पूर्ण भवन व जमीन सरकार के अधीन रहने की बात लिखी गई है। राजर्षि कॉलेज का लंबे समय से इसी परिसर में संचालन हो रहा है, इतिहास के जानकारों की बातों को सही माना जाए तो राजर्षि कॉलेज का पूरे परिसर सरकार के अधीन होना चाहिए। इस हिसाब से कॉलेज परिसर में किसी प्रकार के बदलाव की अनुमति सरकार ही दे सकती है।

शहर के लिए था प्राकृतिक ऑक्सीजन प्लांट

राजर्षि कॉलेज जिले के युवकों का केवल अध्ययन केन्द्र ही नहीं है, बल्कि यह शहरवासियों के लिए सबसे बड़ा ऑक्सीजन प्लांट था। कारण है कि पहले राजर्षि कॉलेज परिसर में इतनी बड़ी मात्रा में हरे पेड़ पौधे थे, जिनसे उत्सर्जित ऑक्सीजन शहरवासियों को स्वस्थ रखती थी। कोरोनाकाल में अलवरवासियों की सलामती में राजर्षि कॉलेज की हरियाली का बड़ा रोल रहा है। पहले राजर्षि कॉलेज में इस कदर हरियाली थी कि शहर के कम्पनी बाग, नेहरू उद्यान या अन्य किसी जगह इतने पेड़ एक साथ दिखाई नहीं पड़ते थे।