
अलवर. बीते दो दशक से सरिस्का बाघ परियोजना शिकारियों के शिकंजे से बाहर नहीं निकल पा रहा है। फर्क आया तो सिर्फ इतना कि पहले शिकार की घटनाओं से बाबरिया गैंग का जुड़ाव रहा तो अब स्थानीय लोग भी बाघ जैसे शिड्यूल फस्र्ट के वन्यजीव का शिकार करने से नहीं हिचक रहे। बाघ पुनर्वास के बाद सरिस्का में दो बाघ व एक बाघिन के शिकार की घटनाओं में स्थानीय लोगों का हाथ रहा है। वहीं वर्ष 2004 से पूर्व की ज्यादातर बाघ शिकार की घटनाओं से बाबरिया गैंग का जुड़ाव रहा।
सरिस्का में बाघिन एसटी-5 का शिकार कोई नई घटना नहीं है। इससे पूर्व भी बीते दो दशक में कई बाघ शिकारियों के हत्थे चढ़ चुके हैं। पूर्व में शिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो पाने का नतीजा है कि इन दिनों भी सरिस्का फिर से शिकारियों के रडार पर है।
सरिस्का में बदला शिकार का ट्रेंड
सरिस्का में वन्यजीवों के शिकार की घटनाएं तो जारी हैं, लेकिन यहां शिकार के ट्रेंड में बदलाव आया है। वर्ष 2002 से 04 तक सरिस्का में बाघों का खूब शिकार हुआ। नतीजा यह रहा कि वर्ष 2005 में सरकार को सरिस्का को बाघ विहिन घोषित करना पड़ा। वर्ष 2004 से पहले सरिस्का में बाघों की संख्या 20 से ज्यादा रही थी। इस दौरान बाघ व पैंथरों के शिकार की ज्यादातर घटनाओं में बावरिया गैंग का हाथ रहा। इनमें कल्या बावरिया, सूरता बावरिया सहित कई अन्य कुख्यात शिकारी शामिल थे। खेतों की रखवाली के नाम बावरिया गैंग ने सरिस्का में सक्रिय हुई। बावरिया गैंग के लोगों ने सरिस्का में जंगली सूअर, सांभर आदि के शिकार से शुरुआत की और बाद में स्थानीय लोगों का सहयोग मिलने पर बाघ व पैंथर का भी खूब शिकार किया। उस दौरान कल्या बावरिया व सूरता बावरिया का बाघ व पैंथर के शिकार की घटनाओं से जुड़ाव भी साबित हुआ। उन्हें कई मामलों में न्यायालय ने सजा भी सुनाई।
कल्या बावरिया के रहे संसार चंद्र से संबंध
कल्या बावरिया के बाघ अंगों के बड़े तस्कर संसार चंद्र आदि से सम्बन्ध रहे। बावरिया गैंग के सदस्य सरिस्का में बाघ व पैंथर आदि का शिकार कर संसार चंद्र जैसे बड़े तस्करों को बेचते थे। वहां से बाघों के अंग अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजे जाते थे। वर्ष 2002 से 04 के बीच बाघ व पैंथर शिकार की घटनाओं में पकड़े गए कल्या बावरिया व सूरता बावरिया आदि ने अपने बयानों में संसार चंद्र आदि से जुड़ाव स्वीकार भी किया है। उस समय बावरिया गैंग के सदस्यों ने बाघ के अंगों को 20 से 30 हजार रुपए तथा पैंथर के अंगों को 6 से 8 हजार रुपए में बेचने की बात भी स्वीकारी थी।
अब आसपास के गांवों के लोग करने लगे शिकार
वर्ष 2005 के बाद कुख्यात शिकारी कल्या बावरिया व सूरता बावरिया तो सक्रिय नहीं रहे, लेकिन बावरिया परिवार के अनेक लोग वर्ष 2010 के बाद सरिस्का में शिकार की घटनाओं में पकड़े गए हैं। वहीं अब सरिस्का के आसपास के गांवों के लोग भी शिकार की घटनाओं को अंजाम देने लगे हैं। पूर्व में सरिस्का में हुई शिकार की कई घटनाओं में आसपास के गांवों के लोग शामिल रहे हैं। वहीं वर्ष 2010 में बाघ एसटी- 1 को जहर देकर शिकार करने की घटना में भी स्थानीय लोग शामिल रहे। वहीं गत 19 मार्च को इंदौक में बाघ एसटी-11 के शिकार में भी स्थानीय लोगों की संलिप्तता पाई गई। पिछले दिनों बाघिन एसटी-5 के शिकार में भी सरिस्का के आसपास के लोग शामिल रहे हैं।
पढ़े लिखे लोग भी शिकार से जुड़ रहे
शिकार के ट्रेंड में खास बदलाव यह हुआ है कि सरिस्का के आसपास के गांवों के पढ़े लिखे युवा शिकार की प्रवृति की ओर मुड़ रहे हैं। बाघिन एसटी-5 के शिकार के आरोप में गिरफ्तार भडोली निवासी सरफुद्दीन भी 12 वीं कक्षा तक पढ़ा है। वहीं इस घटना में शामिल अन्य लोग भी पढ़े लिखे व 30 से 45 साल की उम्र के बताए गए हैं।
Published on:
30 Oct 2018 06:15 am
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