
सरिस्का का अलवर बफर जोन बन सकता है पर्यटकों की पसंद
अलवर. सरिस्का बाघ परियोजना का अलवर बफर जोन पर्यटकों की पहली पसंद बन सकता है। अलवर शहर के निकट होने के कारण यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। लेकिन इसके लिए सरिस्का प्रशासन ही नहीं, राज्य सरकार को प्रयास करने की जरूरत है। हालांकि अभी राज्य सरकार का पूरा ध्यान मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व एवं रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व पर ही लगा है। यही कारण है कि सरिस्का में युवा बाघों की जरूरत होेने के बाद भी यहां अब तक बाघों के पुनर्वास को हरी झंडी नहीं मिल पाई है, जबकि पहले मुकुंदरा और पिछले दिनों रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में रणथंभौर से टाइगर शिफ्ट किया गया है।
सरिस्का के अलवर बफर जोन में वर्तमान में एक बाघ, बाघिन एवं दो शावक हैं। अलवर बफर जोन अलवर के समीप होने से लोगों की आसान पहुंच में है। यहां का जंगल, पहाड़ खूबसूरत होने के कारण कई पर्यटक सरिस्का के बजाय अलवर बफर जोन की सफारी को प्राथमिकता देते हैं। इस जंगल में बाघों की संख्या में वृदि्ध हो तो अलवर जिले में अलवर बफर जोन एक नए टाइगर रिजर्व की शक्ल ले सकता है।
अलवर बफर जोन का जंगल बड़ा
अलवर बफर जोन का जंगल बड़ा होने से यहां पर्यटकों को टाइगर की साइटिंग नहीं हो पाती। अभी अलवर बफर जोन में चार बाघ, बाघिन व दो शावक हैं, लेकिन ये ज्यादातर समय बालाकिला के पीछे िस्थत पहाड़ी पर रहते हैं, यहां तक पर्यटकों की आसान पहंच नहीं रह पाती। यही कारण है कि सरिस्का के अलवर बफर जोन में अभी बाघों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। हालांकि इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में पैंथर होने से कई बार पर्यटकाें को सफारी में बघेरे के दर्शन हो जाते हैं।
बाघ एसटी-13 के गायब होने गड़बड़ाया संतुलन
सरिस्का में बाघ एसटी-13 के गायब होने से बाघ- बाघिनों का संतुलन गड़बड़ा गया है। सरिस्का में बाघिन एसटी-10, एसटी-12 व एसटी-14 से नए शावकों के जन्म उम्मीदें ज्यादा हैं। लेकिन सरिस्का में बाघ एसटी- 13 के गायब होने से युवा बाघों की कमी हो गई है। ऐसे में सरिस्का में नए बाघ की जरूरत है। सरिस्का में नया बाघ आने और कुनबा बढ़ने पर अलवर बफर जोन में और बाघ आ सकते हैं।
सरिस्का प्रशासन प्रयास करे
रणथंभौर के सीएफ एसआर यादव ने बताया कि सरिस्का में नए बाघ भेजे जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए सरिस्का प्रशासन को कार्रवाई तेज करनी चाहिए। सरकार की ओर से आदेश मिलने पर सरिस्का नया बाघ भेजा जा सकता है।
Published on:
20 Jul 2022 12:58 am
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