
सरिस्का में पर्यटकों को सुविधाओं का क्यूं है इंतजार,सरिस्का में पर्यटकों को सुविधाओं का क्यूं है इंतजार
अलवर. पर्यटकों की बहार से सरिस्का टाइगर रिजर्व ही गुलजार नहीं हो रहा, बल्कि सरकार भी खुशगवार है। कारण है कि पर्यटकों से सरिस्का को प्रवेश शुल्क एवं इको डवलपमेंट शुल्क मिलता है। इस राशि का सरकार वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण, पर्यटकों की सुविधाओं पर उपयोग करे तो सरिस्का में इको टूरिज्म को और भी बढ़ावा मिल सकता है।
सरिस्का प्रदेश के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का प्रमुख टाइगर रिजर्व है। यही कारण है कि यहां हर साल करीब 50 हजार पर्यटक सफारी के लिए आते हैं। बाघों की संख्या में हो रही वृदि्ध भी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने में सहायक रही है। पर्यटकों से सरकार की ओर से प्रवेश शुल्क, इको डवलपमेंट शुल्क के रूप में हर साल कई करोड़ रुपए वसूले जाते हैं।
सरिस्का की बड़ी जरूरत इलेक्टि्रक वाहन
सरिस्का में हर साल पेट्रोल- डीजल से चलने वाले कई हजार वाहन प्रवेश करते हैं। इनमें सफारी के लिए जाने वाली जिप्सी, केंटर के अलावा पाण्डुपोल मंदिर पर जाने वाले वाहन भी शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में पेट्रोल- डीजल वाहनों के धुएं से सरिस्का का पर्यावरण गड़बड़ाना लाजमी है। पर्यटकों को भ्रमण कराने के लिए जिप्सी व केंटर जरूरी है, वहीं पाण्डुपोल मंदिर जाने वाले श्रद़धालुओं पर भी रोक संभव नहीं है। ऐसे में पर्यटकों के लिए सरिस्का में इलेक्टि्रक जिप्सी, केंटर तथा पाण्डुपोल मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए इलेक्टि्रक बसाें का संचालन जरूरी है।
हो सकता समस्या निराकरण
सरकार को सरिस्का टाइगर रिजर्व से होने वाली आय से समस्याओं का निराकरण हो सकता है। सरिस्का में हर साल 50 लाख से ज्यादा रुपए की आय पर्यटकों के प्रवेश शुल्क से होती है। वहीं एक से डेढ़ करोड़ रुपए की आय इको डवलपमेंट शुल्क से होती है। पर्यटकों से होने वाली इस आय का उपयोग सरकार चरणबद्ध तरीके से इलेक्टि्रक वाहनों की खरीद पर करे तो सरिस्का में पर्यावरण की समस्या का निराकरण हो सकता है।
पर्यटकों की अन्य जरूरत भी हो सकती हैं पूरी
सरिस्का में भ्रमण के लिए आने वाले पर्यटकों से मिलने वाले शुल्क से अन्य जरूरतें भी पूरी हो सकती हैं। इनमें शौचालय, पेयजल, स्वागत कक्ष जैसी जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा वन्यजीवों व वनकर्मियों की समस्याओं को भी आसानी से पूरा किया जा सकता है।
फैक्ट फाइल
वर्ष पर्यटक प्रवेश शुल्क इको विकास शुल्क
2017-18 50265 4052268 9946125
2018-19 47933 4044473 10194078
2019-20 44828 4345562 11112213
2020-21 40575 1362788 4084348
2021-22 51069 7189563 14664905
2022-23 56183 7156054 15349363
योग 290853 28150708 65351032
Published on:
18 Sept 2023 11:50 pm
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