अलवर जिले में सरिस्का के पास चल रही मार्बल की ज्यादातर खानों की संचालन सम्मति अप्रेल 2024 तक है, उन्हें फिर से यह रिन्यू करानी होगी। लेकिन संचालन सम्मति रिन्यू होने में सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन का पेच अटक सकता है। यदि खाने बंद हुई तो अलवर जिले में रोजगार का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
अलवर. सरकारों की ढुलमुल नीति के चलते अलवर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आगामी वर्ष में रोजगार का संकट गहरा सकता है। इसका कारण है कि सरिस्का के समीप ज्यादातर मार्बल की खानों की संचालन सम्मति ( सीटीओ ) की अवधि अप्रेल 2024 तक है। इसके बाद संचालन सम्मति रिन्यू में सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन की बाधा आ सकती है। इसका नुकसान न केवल खान मालिकों को उठाना पड़ेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो सकता है।
अलवर जिले में फिलहाल रोजगार का बड़ा स्रोत खनन, पर्यटन और मिनरल उद्योग हैं। इनमें मिनरल उद्योग काे कच्चा माल खंडा मार्बल खानों से मिलता है, लेकिन खान संचालन पर संकट खड़ा हुआ तो मिनरल उद्योग पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं। इसका असर यह होगा कि खानों और मिनरल उद्योगों में काम करने वाले कई हजार लोगों के समक्ष रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
दो साल से सरकारों की फुटबॉल बना इको सेंसेटिव जोन
सरिस्का टाइगर रिजर्व का इको सेंसेटिव जोन पिछले दो साल से राज्य व केन्द्र सरकार के बीच फुटबॉल बना है। पहले करीब एक साल राज्य सरकार में यह प्रस्ताव लंबित रहा, वर्तमान में केन्द्र सरकार के पास विचाराधीन है। लंबा समय बीतने के बाद भी सरकारें इको सेंसेटिव जोन का अंतिम प्रकाशन नहीं कर पाई। जबकि खान एवं उद्योग संचालक राज्य सरकार से लेकर केन्द्र के पर्यावरण मंत्री को कई बार सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन से होने वाली परेशानियों से अवगत करा चुके हैं।
कितने रोजगार का होता है सृजन
सरिस्का के समीप अभी करीब 65 मार्बल की खानें चल रही हैं, वहीं करीब 70 फिलहाल बंद है। इको सेंसेटिव जोन का अंतिम प्रकाशन होने पर करीब 150 नई खानें शुरू हो सकती हैं। सामान्य: एक खान से 100 लोगों का रोजगार जुड़ा होता है। यानी संचालन सम्मति नहीं बढ़ने से मार्बल की खानों का संचालन बाधित होता है तो सात हजार लोगों का रोजगार प्रभावित होने का खतरा है। वहीं खानें बंद होने से सात हजार से ज्यादा लोगों का रोजगार पहले ही छिन चुका है। वहीं 150 नई खान शुरू नहीं हो पाने से 15 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। साथ ही करीब 200 मिनरल उद्योगों में करीब 5 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। इन पर संकट आने से यहां कार्य करने वाले लोगों का रोजगार भी खत्म हो सकता है। साथ ही खान व उद्योगों से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े कई हजार लोगों का रोजगार भी प्रभावित होगा।