
सरिस्का का हो विस्तार तो बढ़े बाघ
अलवर. सरिस्का टाइगर रिजर्व की अलवर बफर रेंज बाघों की नर्सरी है, यानी यहां नए बाघों को ठिकाना बनाने के लिए खुले जंगल की जरूरत है, ऐसे में बफर रेंज में अलवर वन मंडल की शाहपुर रेंज को जोड़ दिया जाए तो यहां बाघों की नए खेप तैयार होने में सहुलियत होगी।
अलवर शहर से टाइगर रिजर्व सरिस्का की अलवर बफर रेंज सटी है। करीब 350 वर्ग किलोमीटर में फैली यह रेंज बाघों के लिए सहज है। यही कारण है कि तीन- चार साल में ही बाघों का कुनबा छह तक पहुंच गया है। आगामी समय में यहां नए बाघों के आने की उम्मीद है।
आबादी में न जाएं बाघ, वन क्षेत्र का विस्तार जरूरी
अलवर बफर रेंज एक ओर से अलवर शहर की सीमा से सटी है। वहीं इस रेंज में कई गांव भी बसे, वहीं गांवों में आने- जाने के लिए सड़क व कच्चे पक्के रास्ते हैं। इस कारण अलवर बफर रेंज में बाघों को स्वच्छंद विचरण के लिए वन क्षेत्र का दायरा कम है। आगामी समय में यहां बाघों के बढ़ने पर यह समस्या गहरा सकती है और बाघ आबादी या गांवों की तरफ मुड़ सकते हैं। इस समस्या से बचने के लिए सरकार काे अलवर बफर रेंज का दायरा बढ़ाने के लिए अभी से प्रयास करने की जरूरत है।
शाहपुर वन क्षेत्र तक वन्यजीव करते हैं विचरण
वनमंडल अलवर के वन क्षेत्र शाहपुर तक वन्यजीवों का विचरण रहा है। पूर्व में यहां पैंथर, बाघ एवं अन्य वन्यजीवों का मूवमेंट रहा है। इस कारण शाहपुर वन क्षेत्र को अलवर बफर रेंज में शामिल करने की जरूरत है। इससे अलवर बफर रेंज का क्षेत्र शाहपुर एवं जिंदोली के आगे तक हो सकेगा। इस क्षेत्र में ज्यादा मानवीय दखल नहीं होने से यह बाघों की नर्सरी के लिए बेहतर साबित होगा।
सरिस्का प्रशासन के प्रयास जारी
सरिस्का प्रशासन अलवर बफर रेंज का दायरा बढ़ाने के प्रयास में जुटा है। शाहपुर वन क्षेत्र को बफर रेंज में जोड़ने के लिए सरिस्का प्रशासन की ओर से प्रस्ताव तैयार उच्च अधिकारियों को भेजे गए हैं। सरकार स्तर पर यह प्रस्ताव विचाराधीन है।
Published on:
27 Jul 2023 11:54 pm
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