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100 बालिकाओं की सुरक्षा एक चौकीदार के भरोसे

एक कमरे में 4 बालिकाओं के रहने की व्यवस्था है। प्रत्येक कमरे में चार बेड, कुर्सी, मेज सहित आलमारी है। छात्रावास में दो वार्डन, तीन कुक, एक चौकीदार सहित छह कर्मचारी कार्यरत हैं। जहां मुख्य वार्डन सरकार की सेवाओं में नियुक्त सरकारी अध्यापिका हैं, वहीं सहायक वार्डन, तीन कुक, एवं एक चौकीदार एजेंसी के मार्फत नियुक्त है।

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अलवर

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mohit bawaliya

Apr 16, 2023

100 बालिकाओं की सुरक्षा एक चौकीदार के भरोसे

100 बालिकाओं की सुरक्षा एक चौकीदार के भरोसे

खेरली. राज्य सरकार की योजना समग्र माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत संचालित कस्बा स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में 100 बालिकाओं की सुरक्षा एक ही चौकीदार के भरोसे है। जिसे 24 घंटे ड्यूटी देनी पड़ती है। कस्बे के राबाउमावि परिसर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय छात्रावास में कुल 100 स्थान है, जो कि सभी भरे हुए है। आवासीय विद्यालय में प्रवेश के लिए एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, बीपीएल, सुविधा एवं अभावग्रस्त बालिकाओं को वरीयता दी जाती है। छात्रावास के दो मंजिला भवन में कुल 30 कमरे हैं। जिनमें कक्षा 9 से 12 तक की बालिकाओं के रहने के लिए 25 कमरे है। एक कमरे में 4 बालिकाओं के रहने की व्यवस्था है। प्रत्येक कमरे में चार बेड, कुर्सी, मेज सहित आलमारी है। छात्रावास में दो वार्डन, तीन कुक, एक चौकीदार सहित छह कर्मचारी कार्यरत हैं। जहां मुख्य वार्डन सरकार की सेवाओं में नियुक्त सरकारी अध्यापिका हैं, वहीं सहायक वार्डन, तीन कुक, एवं एक चौकीदार एजेंसी के मार्फत नियुक्त है। छात्रावास में बालिकाओं के अतिरिक्त वार्डन रहती हैं। सरकारी व्यवस्था की खामी के चलते इनकी सुरक्षा के साथ लापरवाही बरती जा रही है। आवासीय विद्यालय के पूरे परिसर की सुरक्षा के लिए एक ही चौकीदार नियुक्त है, जिसकी 24 घंटे की ड्यूटी होती है। कभी उसके अवकाश पर जाने के दौरान अतिरिक्त व्यवस्था के लिए बडी मशक्कत करनी पड़ती है।
वार्डन की देखरेख में दैनिक जीवनचर्या निर्धारित

प्रवेश के समय फॉर्म के साथ माता-पिता एवं भाई तीनों की फोटो और परिचय पत्र लिया जाता है। आकस्मिक अवकाश देने के दौरान इन्हीं तीन को ही अनुमति दी जाती है। अवकाश प्राप्त बालिकाओं को लेने आने वालों की फोटो और आईडी लेकर छुट्टी दी जाती है। छात्रावास में रहने के दौरान मोबाइल फोन की अनुमति नहीं है। परिजनों से बात कराने के लिए छात्रावास में लैंडलाइन फोन काम में लिया जाता है। छात्राओं की वार्डन की देखरेख में दैनिक जीवनचर्या निर्धारित होती है। सुबह जागने से लेकर रात्रि में शयन का समय निर्धारित किया हुआ है। जिसमें पढऩे, खेलने, नाश्ता, भोजन सभी का समय निश्चित है। छात्रावास में प्रतिदिन बदलते हिसाब से भोजन बनाया जाता है एवं रविवार को स्पेशल डाइट भी दी जाती है। बालिकाओं के स्वास्थ्य की चिकित्सा अधिकारी के द्वारा परीक्षण भी कराया जाता है। छात्रावास का साप्ताहिक निरीक्षण प्रधानाचार्य एवं मासिक निरीक्षण मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अथवा उपखंड अधिकारी की ओर से किया जाता है। छात्रावास की बालिकाओं के लिए राज्य सरकार की ओर से 1 वर्ष में 1650 रुपए प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। छात्राओं को ट्रैक सूट, ब्लेजर, यूनिफॉर्म, पुस्तक आदि सभी नि:शुल्क दिए जाते हैं। इन सभी व्यवस्थाओं में यदि कोई कमी है तो केवल यह कि इन सभी व्यवस्थाओं की देखरेख जिन कर्मियों के जिम्मे है, वे सभी निजी एजेंसी के मार्फत लगे हुए हैं। जिनका मानदेय न्यूनतम मजदूरी से भी कम है। जहां सहायक वार्डन, हैड कुक एवं चौकीदार को 5000 रुपए मानदेय दिया जाता है, वही सहायक कुक को 4500 रुपए मानदेय भुगतान किया जाता हैं।
एक ही चौकीदार स्वीकृत
छात्रावास की छात्राओं को निरंतर 2 वर्ष अच्छे अंक प्राप्त करने पर स्कूटी मिली है। यहां पढ़ाई का श्रेष्ठ वातावरण है। एक ही चौकीदार होने से समस्या तो आती है, पर मैनेज करना पड़ता है। सरकार की ओर से एक ही चौकीदार स्वीकृत है, जो एजेंसी के मार्फत है। नियुक्त कर्मी मानदेय बढ़ाने की कहते रहते हैं।

अनीता कांवत, प्रधानाचार्य राबाउमावि, खेरली।