अलवर. सुभाष चौक ( पुराना कटला) स्थित जगन्नाथ मंदिर में आयोजित किए जा रहे जगन्नाथ महोत्सव के कार्यक्रमों के तहत सोमवार देर शाम को भगवान सीतारामजी की सवारी बैंडबाजे के साथ सुभाष चौक स्थित मंदिर से रवाना हुई। जो विभिन्न मार्गों से होते हुए रूपबास मंदिर पहुंचेगी। मान्यता है कि वहां सीताराम जी मेला स्थल व जानकी मैया के विवाह की तैयारियों का निरीक्षण करेंगे और 27 जून को निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की अगवानी रूपबास मंदिर में करेंगे। इसलिए एक दिन पूर्व वह रवाना हो गए। इधर 72 घंटे के बाद सोमवार को भगवान जगन्नाथ ने दूल्हा रूप में तैयार होकर भक्तों को दर्शन दिए। वहीं मंगलवार को पुराना कटला स्थित जगन्नाथ मंदिर से शाम 6 बजे भगवान जगन्नाथ की सवारी बैंडबाजे व शाही लवाजमे के साथ रूपबास के लिए रवाना होगी। भगवान की रथयात्रा में विभिन्न प्रकार की झांकी, घोडे, भजन मंडलियां, अखाडा पार्टियां आदि भी शामिल होंगे। इधर रूपबास में भरने वाले मेले की तैयारियों का प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से जायजा लिया जा रहा है। मेला स्थल पर विभिन्न प्रकार की अस्थाई दुकाने लगी है। इसके अलावा मनोरंजन के लिए छोटे-बड़ेे झूले भी लगे है।
भगवान जगन्नाथ की सेहत का रख रहे विशेष ख्याल
भगवान जगन्नाथ के विवाह के चलते इन दिनों दूल्हा बनने वाले जगन्नाथ भगवान की विशेष सेवा की जा रही है। भगवान को इन दिनों खास तौर से अटके का भोग लगाया जा रहा है। जिसमें नाश्ता हल्का दिया जा रहा है कभी खिचडी तो कभी दलिया भी खिलाया जा रहा है। भगवान के विवाह के लिए खासतौर से पौशाक तैयार करवाई गई है। प्रतिदिन नई पौशाक पहनाई जा रही है। कंगन डोरे बंधने के दौरान पंचरंगी पौशाक पहनाई गई। जो सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रही। इसके अलावा विशेष रंग-बिरंगे फूलों से वरमाला तैयार करवाई गई है। इसके अलावा रूपबास व सुभाष चौक स्थित जगन्नाथ मंदिर पर विशेष सजावट की गई है।
1 जुलाई को जानकी संग लौटेंगे जगन्नाथ
मेला कमेटी ने बताया कि 27 जून को सांय 6 बजे सुभाष चौक मंदिर से भगवान जगन्नाथ जी महाराज की रथयात्रा रवाना होगी। जो त्रिपोलिया, होपसर्कस, घंटाघर, पंसारी बाजार, नगर परिषद, मन्नी का बड़, नंगली सर्किल, एसएमडी सर्किल, मोती डूंगरी, भवानी तोप, मालवीय नगर होते हुए रूपबास स्थित विवाह स्थल पर पहुंचेंगी। 28 जून को रूपबास में भर मेले का आयोजन होगा। इसके अगले दिन 29 जून को सुबह 8 बजे सुभाष चौक मंदिर से जानकी मैयाजी की सवारी कलश यात्रा के साथ रूपबास पहुंचेंगी। यहां दिनभर मेला व रात्रि को 10 बजे वरमाला महोत्सव होगा। 30 जून को भी रूपबास में मेला भरेगा। इसके अगले दिन 1 जुलाई को शाम 5 बजे माता जानकी संग भगवान जगन्नाथ जी रूपबास से सुभाष चौक के लिए रवाना होंगे। 3 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को दोपहर 12 बजे ब्रहा्रभोज का आयोजन होगा।