
इंसान ही नहीं पशु- पक्षियों का भी कर रहे देखभाल
.कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए चल रहे लॉक डाउन के दौरान बहुत सी समाज सेवी संस्थाएं और लोग आगे आ गए हैं।अब इंसानों के साथ लोगों को पशुओं व पक्षियों की भी चिंता हो रही है जो उनके लिए चारा व फल तथा सब्जी लेकर जा रहे हैं।गौनंदी सेवा समिति की ओर से पूरे शहर में गायों को जाकर चारा खिलाया जा रहा है। रोटी बैंक की ओर से पशुओं, बंदरों के लिए केले, संतरे व सब्जियां वितरित की गई। इस बैंक की ओर से शहर में जगह-जगह रोटी सब्जी के पैकेट वितरित किए जा रहे हैं। बी.एल.पब्लिक शिक्षा समिति की ओर से शहर मे बाल काटने का काम करने वाले गरीब सैन समाज के लोगों को राशन किट वितरित किए गए।सचिव सुनील बिल्खा ने बताया कि समाज का वह कमजोर व जरूरतमद वर्ग जो दो समय की रोटी के लिए रोज कमाता है। उन परिवारों के समक्ष दो समय की रोटी की भी समस्या हो रही है। एेसे चयनित परिवारों को राशन किट वितरित किए जा रहे हैं। खेम चन्द सैन, नरसी सैन व हरि सैन,आदि से सम्पर्क कर एक सूची तैयार की, और फोन के द्वारा उन परिवारों को सूचित कर उन्हें राशन किट प्रदान करना प्रारम्भ किया । इस कार्य में सुमन बिल्खा, विश्व , ईशान , मुकेश व राजेश भी सहयोग प्रदान कर रहे हैं ।
बाई, ड्राइवर , माली देख रहे प्रशासन की राह
कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते इन दिनों पूरे देश में लोक डाउन है ऐसे में उन लोग उन लोगों को परेशानियां हो रही है जो जो घरों में छोटे-मोटे काम करके अपनी आजीविका चलाते हैं। लुक डाउन के चलते इनको काम से हटा दिया गया है ऐसे में इनके घरों में बच्चों के भूखे मरने की नौबत आ गई है! काम नहीं होने के कारण अधिकतर मालिकों ने इनका वेतन देने से भी इनकार कर दिया है। ऐसे में यह लोग प्रशासन की राह तक रहे हैं जिससे उन्हें कोई राहत मिले! भले ही सरकार ने इन सब मालिकों को अपने कर्मचारियों को काम सेना हटाने तथा इनका वेतन देने के निर्देश दिए हो लेकिन इनकी पालना नहीं हो पा रही है।सूर्य नगर में रहने वाली एक महिला दयावंती ने इशारों से बताया कि उसके दो बच्चे हैं और पति की मृत्यु हो चुकी है वह घर घर झाड़ू पोचाकरके अपना और अपने बच्चों का पेट भरती है करीब 5 घरों में जाने के बाद उसे 3000 रुपए मिलते हैं खाना पीना भी वहीं से मिलता है, लेकिन लुक डाउन के चलते अब वह काम पर नहीं जा पा रही है ऐसे में मालिकों ने भी 15 दिनों का वेतन देने से इंकार कर दिया है! इधर मालिक के पास ड्राइवर की नौकरी करने वाले रमेश ने बताया कि उसे गाड़ी चलाने के 5000 रुपए मिलते हैं लेकिन वह गाड़ी नहीं चला रहा इसलिए इस बार मालिक ने पगार देने से मना कर दिया है। ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो गया है स्कूल खुलते ही स्कूलों की किताबें आदि भी लानी है! कुछ ऐसी ही परेशानी है किशन लाल की जो की कोठियों में माली का काम करते हैं! इनको भी इस बार वेतन नहीं मिलने का मलाल है क्योंकि पिछले 15 दिनों से यह पेड़ पौधों की संभाल ही नहीं कर पाए हैं। ऐसे 12 नहीं बहुत से उदाहरण है जो इन दिनों परेशानी के दौर से गुजर रहे हैं इनकी मुश्किल यह है कि यह अपने मालिकों के खिलाफ आवाज भी नहीं उठा सकते ऐसे में मालिक इनकी मजबूरी का फायदा उठाकर इन को वेतन देने से मना कर रहे हैं।
Published on:
06 Apr 2020 10:19 pm
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