
अलवर. अभावों के बीच जीत की राह तलाशने वाली अलवर की बेटी सुहाना भी कॉमनवेल्थ गेमों में मेडल जीत अलवर का नाम देश दुनिया में रोशन करना चाहती हैं। सुहाना ने छोटी उम्र में लगातार तीन गोल्ड मैडल व दो सिल्वर मैडल जीतकर यह साबित कर दिया है कि बेटियां बेटों से कम नहीं है। वेट लिफ्टिंग खेल में अभी तक निजी स्कूलों का ही कब्जा रहा है। इसका कारण है कि खिलाड़ी को निरंतर अभ्यास के अलावा अच्छा खानपान भी जरूरी होता है। सुहाना वर्तमान में एसएमडी स्कूल में 11 वीं कक्षा की विद्यार्थी है।
पुरस्कार की राशि से बहन भाइयों को पढ़ाती हैं सुहाना
अभी सुहाना नयाबास चौराहे के समीप एक किराए के मकान में रहती है। घर में तंगी के हालात होने के बाद भी उसने हार नहीं मानी। माता जमीला और पिता राजेश खान रोज सुबह मजदूरी पर जाते हैं, जब मजदूरी नही मिलती है तो पिता को रिक्शा भी चलाना पड़ता है। कई बार तो वे घर का किराया भी नहीं दे पाते। उसके चार बहनें और एक छोटा भाई है। प्रतियोगिता में जीतने पर जो राशि मिलती है उससे वह अपने बहन भाइयों को पढ़ा रही है। खान ने बताया कि जिम में वह निशुल्क अभ्यास करती हैं। जिम संचालक अनिल चुघ के निरंतर प्रोत्साहन से ही वो यहां तक पहुंच पाई है।
गोल्ड मैडल जीतने के बाद ही पिता को बताया
खान ने बताया कि वे मेवात से जुड़ी हुई है। घर में सभी चाहते थे कि उसकी शादी हो लेकिन मां जमीला खान चाहती थी कि बेटियां पढ़े और आगे बढ़ें। शिक्षिका विभा चुघ ने सबसे पहले उसकी प्रतिभा को पहचाना और उसे वेट लिफ्टिंग चैँपियनशिप के लिए तैयार किया। जब वह पहली बार चैम्पियनशिप में चूरू गई तो मां ने पिता से कहा कि नानी के घर गई है। वहां उसने गोल्ड मैडल जीता । वापस लौटने पर जब पिता को गोल्ड मैडल दिखाया तब पहली बार पिता की आंखों में खुशी दिखाई दी। इसके बाद उन्होंने कभी खेलने के लिए मना नहीं किया। सुहाना चाहती है कि उसकी बहनें भी खेलों में आगे बढ़े।
यह जीते हैं पुरस्कार
-राजस्थान वेट लिफ्टिंग ऐसोसिएशन की ओर से 2014 -15 में चूरू में गोल्ड मैडल।
- 46 वीं राजस्थान स्टेट वेट - --लिफ्टिंग चैंपियनशिप 2015 में गोल्ड मैडल।
- इंडियन वेट लिफ्टिंग फैडरेशन की ओर से सीकर में 2015 -16 में गोल्ड मैडल
- राजस्थान स्टेट वेट लिफ्टिंग चैंपियनशिप 15 से 17 दिसंबर 2017 में सिल्वर मैडल।
Published on:
10 Apr 2018 02:33 pm
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