
उनके लिखे पत्र और इतिहासकारों के अनुसार स्वामी विवेकानन्द ने 1891 व 1894 में चार पत्र अशोका टाकीज के यहां रहने वाले गोविन्द सहाय को लिखे थे। इन पत्रों में स्वामीजी ने लिखा कि (वत्स, धर्म का रहस्य आचरण से जाना जा सकता है। व्यर्थ के मतवादों से नहीं। सच्चा बनना और सच्चा बर्ताव करना इसमें ही समग्र धर्म निहित है। जो केवल मात्र प्रभु-प्रभु की रट लगाता है, वह नहीं, बल्कि जो उस परम पिता की इच्छानुसार कार्य करता है। वही धार्मिक है। अलवर निवासी युवको तुम लोग जितने भी हो, सभी योग्य हो। मैं आशा करता हूं कि तुममें से अनेक व्यक्ति अविलम्ब ही समाज के भूषण तथा जन्म भूमि के कल्याण के कारण बन सकेंगे।)
जानिए स्वामीजी की चिट्ठियों के जरिए दिए संदेश
दूसरे पत्र में लिखा (मन की गति चाहे जैसी भी क्यूं न हो, तुम नियमित रूप से जप करते रहना। हरबक्स से कहनाकि पहले वाम नासिका तदनन्तर दक्षिण एवं पुन: वाम नासिका,इस क्रम से वह प्राणायाम करता रहे। विशेष परिश्रम के साथ संस्कृत का अभ्यास करो।)
1894 का यह पत्र आज भी सुरक्षित
प्रिय गोविन्द सहाय, साधुता ही श्रेष्ठ नीति है तथा धार्मिक व्यक्ति की विजय अवश्य होगी। वत्स, सदा इस बात को याद रखना कि मैं कितना भी व्यस्त, कितनी भी दूरी पर अथवा कितने भी उच्च वर्ग के लोगों के साथ क्यूं न रहूं। फिर भी मैं अपने बंधु वर्ग के प्रत्येक व्यक्ति के लिए चाहे उनमें से अत्यधिक साधारण स्थिति का ही क्यों न हो। उनके लिए भी सदा प्रार्थना कर रहा हूं। उनको मैं भूला नहीं हूं। इति। जीडब्ल्यू हैले, शिकागो, यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमरीका।
11 पत्र अलवर के लोगों को लिखे
लाला गोविंद सहाय के पौत्र राजाराम मोहन गुप्ता ने बताया कि स्वामी विवेकानन्द ने अलवर के लोगों को करीब ११ पत्र लिखे हैं। जिनका उल्लेख भी मिलता है। चार पत्र गोविन्द सहाय को लिखे हें।
1. शिकागो से : स्वामी विवेकान्द ने वर्ष 1894 में शिकागो के जेडब्ल्यू हेल से अलवर के गोविन्द सहाय को पत्र लिखा। यह पत्र आज भी गोविन्द सहाय की पीढ़ी ने संभाल कर रखा है।
2. शिकागो से : स्वामी ने 1894 में ही शिकागा से गोविन्द सहाय को एक और पत्र लिखा है।
3. आबू पर्वत से : गोविन्द सहाय को आबू पर्वत से 1891 में पत्र लिखा।
4. आबू पर्वत से : 30 अप्रेल 1891 को भी आबू पर्वत से एक पत्र लिखा गया।
Published on:
12 Jan 2018 11:58 am

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