अलवर. नाथ परंपरा के सिद्ध योगियों की तपोभूमि के रुप में विख्यात अलवर जिले में घर-घर में पूजे जाने वाले लोक देवता बाबा भर्तृहरी महाराज का तीन दिवसीय मेला परवान पर है। शनिवार को मेले के अंतिम दिन बाबा के दर्शन के लिए देश भर से श्रद्धालु भर्तृहरि धाम पहुंचते रहे। इसके अलावा घरों में बाबा की ज्योत देखी गई। बाबा को दाल, बाटी व चूरमा सहित अन्य पकवान बनाकर भोग लगाया गया। मेले के चलते मालाखेडा से लेकर नटनी का बारां तक श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। सरिस्का स्थित भर्तृहरी बाबा का विशाल मंदिर अलवर जिले सहित आसपास के राज्यों का आस्था का केंद्र है। बाबा के दर्शन के लिए कई दिन पहले से ही दूर-दराज हरियाणा, यूपी सहित कई राज्यों से श्रद्धालुओ का पैदल चलकर दर्शन करने के लिए आना शुरू हो गया था। कोई नाचते-गाते, कोई दंडोति देते, तो कोई पैदल यात्रा कर बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे। मेले के अंतिम दिन अधिक भीड़ होने के चलते श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। जगह-जगह पर मीठे जल की प्याऊ व प्रसाद का वितरण किया जा रहा है। मेले के अवसर पर भर्तृहरि परिसर में स्थित बाबा गोरखनाथ, बाबा मछंदर नाथ के मठ में रंग बिरंगी रोशनी से सजावट की गई। इधर मेले के चलते रोडवेज बसों में भी भारी भीड़ देखी जा रही है। मंदिर मार्ग पर जगह-जगह विभिन्न धार्मिक संगठनों व संस्थाओं तथा समाजसेवियों की ओर से भंडारे लगाए गए है। जहां श्रद्धालुओं के बैठकर भोजन करने की व्यवस्था है।
वादियो में गूंजे भर्तृहरि के जयकारे
मेले के चलते अरावली की वादियों में दिन भर भर्तृहरि बाबा के जयकारे गूंजते रहे। भर्तृहरि का लक्खी मेला पूरे योवन पर था। भर्तृहरि जोग लियो….जोगी बनगो नाथ भर्तृहरि….डोरी खींच भर्तृहरि बाबा…. आदि गीतों को गाते हुए झुंड के झुंड थिरकते हुए रफ्ता-रफ्ता आगे बढ़ते दिखाई दिए। बीच-बीच में गंूजते बाबा के जयकारे श्रद्धालुओ का जोश बढ़ा रहे थे। श्रद्वालुओं ने भरथरी के थान पर ढोक लगा मनौती मंागी। मेले मे महिलाओं ने अपने बच्चो की दिर्घायु की कामना के लिए बाबा के दरबार में जडूले उतार कर मन्नत मांगी।
सजी दुकाने, जमकर की खरीदारी
मेला स्थल पर अस्थाई दुकाने सजी है, जहां श्रदालुओं ने जरूरत का सामान खरीदा। दुकानदारों ने बताया कि बाबा भर्तृहरि के लक्खी मेले में हर दिन हजारों लाठियों बिकती है। सजावटी-बनावटी और मजबूत लाठियों की इस बार ज्यादा मांग रही। जिससे लाठी बेचने वालों की बिक्री बढ़ गई। इसके अलावा मेले में मूसल, तवे, बिलौनी सहित लकड़ी व लोहे के कई घरेलू आइटम की लोगो ने जमकर खिरीदारी की।