11 जुलाई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस साल इन सपनों को नहीं लग पाए पंख

शहर के विकास में यूआईटी व नगर निगम महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं लेकिन 2023 में इन विभागों ने शहर को कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं दिया। कुछ काम फाइलों से बाहर निकले लेकिन वह टेंडर तक नहीं पहुंचे। यूआईटी के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के टेंडर निरस्त होते रहे। वहीं नगर निगम में मेयर की कुर्सी को लेकर खींचतान चलती रही। धरना-प्रदर्शन भी हुए। वहीं जनता ने महीनों तक रोड लाइटों के खराब होने के चलते अंधेरे में रातें काटी। गंदगी का भी सामना सालभर करते रहे। शहर पूरी तरह साफ नहीं हो पाया।
3 min read
Google source verification

अलवर

image

susheel kumar

Dec 25, 2023

इस साल में इन सपनों को नहीं लग पाए पंख

इस साल में इन सपनों को नहीं लग पाए पंख

:: ईयरएंडर ::

यूआईटी ने शहर को दिया पार्क तो पार्किंग का सपना अधूरा...नगर निगम में मेयर कुर्सी को लेकर खींचतान
- सालभर यूआईटी कोई बड़ा प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं ला पाई, सभी कागजों तक ही रहे सीमित
- नगर निगम ने जनता को खूब दिया दर्द, महीनों तक अंधेरे में गुजरी रातें, गंदगी से पटा रहा शहर

शहर के विकास में यूआईटी व नगर निगम महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं लेकिन 2023 में इन विभागों ने शहर को कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं दिया। कुछ काम फाइलों से बाहर निकले लेकिन वह टेंडर तक नहीं पहुंचे। यूआईटी के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के टेंडर निरस्त होते रहे। वहीं नगर निगम में मेयर की कुर्सी को लेकर खींचतान चलती रही। धरना-प्रदर्शन भी हुए। वहीं जनता ने महीनों तक रोड लाइटों के खराब होने के चलते अंधेरे में रातें काटी। गंदगी का भी सामना सालभर करते रहे। शहर पूरी तरह साफ नहीं हो पाया।

यूआईटी ने ये दिया सालभर
- यूआईटी ने मिनी सचिवालय का निर्माण पूरा करके शहर को बड़ी सौगात दी। जनता को काफी आराम मिला। इस पर करीब 127 करोड़ रुपए खर्च हुए।
- यूआईटी ने साल के आखिर में सबसे बड़ा प्रोजेक्ट शहर को एक पार्क दिया है। काली मोरी पार्क का निर्माण चल रहा है। एक करोड़ की लागत से ये तैयार हो रहा है। करीब 5 बीघा में बन रहा है।
- बाला किले में शस्त्र संग्रहालय बनाया जा रहा है, जिसका काम अंतिम चरण में चल रहा है। ये पिकनिक स्पॉट बनेगा।
- मेडिकल कॉलेज, गौरव पथ की सड़कें बनाईं। बिजलीघर चौराहे वाले मार्ग समेत 4 जगहों पर डिवाइडरों का निर्माण किया।
- अंबेडकर नगर, वैशाली नगर, विज्ञान नगर, शालीमार में सबसे अधिक भूखंड इस बार बिके। यूआईटी के खजाने में सालभर में 100 करोड़ से अधिक रकम आई।
- अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर चलाकर करीब 300 बीघा से अधिक भूमि को सरकारी करवाने की कवायद शुरू की।

- शहर के नंगली सर्किल, टेल्को व हनुमान सर्किल पर तिरंगा फहराया।
ये काम नहीं हो पाए सफल
- कंपनी बाग में डबल बेसमेंट पार्किंग 23 करोड़ की लागत से बननी थी। दो बार टेंडर किए। सरकार को पसंद नहीं आए। अब तीसरी बार टेंडर होगा। जनता को पार्किंग की सुविधा नहीं मिल पाई।
- बहरोड़ मार्ग पर कन्वेंशन सेंटर के जरिए हस्तकला के कलाकारों को मंच देना था। करीब 25 करोड़ रुपए इस पर खर्च होने थे। ये प्रोजेक्ट भी धरातल पर नहीं आया।
- गौरव पथ को स्मार्ट बनाना था। 200 करोड़ की लागत से एलिवेटेड रोड बनना था और इस मार्ग की बिजली लाइनें अंडरग्राउंड होनी थी जो नहीं हो पाईं।
- यूआईटी को अपना नया कार्यालय नहीं मिल पाया। इस पर 25 करोड़ खर्च होने थे। जगह चयन में ही अफसर उलझे रहे।

नगर परिषद का उच्चीकरण...बना नगर निगम
नगर परिषद का उच्चीकरण करके नगर निगम बनाया गया। ये खुशखबरी शहरियों को मिली। नगर निगम ने करीब 20 वार्डों में सड़क, नालियों के निर्माण के लिए करीब 7 करोड़ रुपए जारी किए। गौरव पथ पर अतिक्रमण हटाकर नया संदेश देने की कोशिश की। सफाई टेंडर के लिए कठोर नियम तैयार किए गए। रोड लाइटें 18 हजार से अधिक खराब हुईं। जनता ने तीन माह दर्द झेला। बमुश्किल टेंडर करवाकर काम हुआ। नगर निगम में मेयर कुर्सी को लेकर खींचतान चली। कभी नेता डीएलबी पहुंचे तो कभी कोर्ट। पार्षदों ने कई दिन तक धरना भी दिया।

ये काम नहीं कर पाया नगर निगम
- नगर निगम को तांगा स्टैंड पर मल्टी स्टोरी पार्किंग बनानी थी। ये प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया।
- हाईकोर्ट के आदेशों की पालना में सभी मार्गों को अतिक्रमण मुक्त करना था जो नहीं कर पाए।
- हर वार्ड में सिंगल फेस बोरिंग का प्रस्ताव अधर में लटका हुआ है।
- सभी वार्डों को बराबर सड़क, नाली आदि के कार्य नहीं दे पाए।
- 16 कच्ची बस्तियों के करीब 11 हजार पट्टे जारी नहीं हो सके।

पीडब्ल्यूडी का ये रहा हाल
पीडब्ल्यूडी ने 125 करोड़ की लागत से 19 नगर निकायों में सड़क बनाने का काम किया। शहर की 20 सड़कों का 30 करोड़ की लागत से निर्माण किया। काम सबसे तेज गति से हुआ। वहीं दूसरी ओर पीडब्ल्यूडी काली मोरी पर अंडरपास सालभर में नहीं बना पाया। हसन खां मेवात ओवरब्रिज 62.86 करोड़ की लागत से बनना था जो शुरू नहीं हो पाया। इसी तरह किशनगढ़बास-कोटपूतली रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज नहीं बन पाया। सोडावास-मुुंडावर-कोटकासिम में ओवरब्रिज नहीं बना। पहाड़ी-नगर-छोंकरवाड़ा पर ओवरब्रिज का काम शुरू नहीं हो पाया।

जिला परिषद : उपलिब्धयां कम, फर्जीवाड़े, घोटाले ज्यादा उजागर हुए
वर्ष 2023 में लंबे समय बाद जिला परिषद अलवर को स्थाई रूप से मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिला। विभागीय मृतक आश्रितों को भी अनुकंपा पर नियुक्ति दी गई। गांवों में चल रहे विकास कार्यों में तेजी भी आई। परिषद की उपलिब्धयां कम रहीं। कई फर्जीवाड़े भी हुए। कई बड़े घोटाले सामने आए। फर्जी शिक्षक और लिपिक की भर्ती का मामला सुर्खियों में रहा। एसओजी जयपुर का भी परिषद में प्रवेश हुआ। फर्जी भर्ती में अरावली थाने में केस दर्ज हुए।