सरिस्का में टाइगर टेरिटरी विस्तार के लिए पेड़ों पर लगा रहे पंजों के निशान
– जमीन पर भी खरोंचें दिख रहीं, इसके जरिए एक टाइगर अपनी सरहद के प्रति दूसरे टाइगर को करता है अलर्ट
– एसटी-15 एरिया में कुछ पेड़ों पर देखे गए नए निशान, इसी के आसपास टाइगर का मूवमेंट भी नजर आ रहा
अलवर. टाइगर की कहानियां दिलचस्प हैं। जितना पढ़ो उतना रौचक। यदि लाइव देखने को मिले तो आनंद दोगुना हो जाता है। हम बताने जा रहे हैं एक और लाइव कहानी। ये स्टोरी सरिस्का के टाइगरों से जुड़ी है। टाइगर अपनी टेरिटरी बनाते हैं लेकिन कुछ टाइगर इस समय अपने इलाके का विस्तार करने में जुटे हैं। यानी अपनी सरहद और बढ़ा रहे हैं। इसके लिए वह पेड़ों पर पंजे आदि के निशान छोड़ रहे हैं ताकि दूसरे टाइगर को अलर्ट किया जा सके।
राजाओं की ओर से बनाए गए वॉच टावर के आसपास पेड़ाें पर खरोंच
सरिस्का में राजाओं की ओर से बनाए गए वॉच टॉवर से जैसे ही कुछ दूरी पर मुख्य मार्ग की ओर बढ़ेंगे तो यह एरिया एसटी 15 का है। इसी क्षेत्र में एक पेड़ के तने पर काफी खरोंच लगी हैं। दूर से ही दिख रहा है कि जैसे पेड़ पर पंचा मारा गया है। इसको लेकर रेंजर्स व गाइड बताते हैं कि ये कहानी दिलचस्प है। पेड़ों के तने पर निशान छोड़कर टाइगर अपनी सीमा का निर्धारण करते हैं। इसके अलावा वहीं पर पेशाब करते हैं ताकि गंध से दूसरे टाइगर को इलाके के बारे में पता लग सके। साथ ही जमीन पर भी खरोंच करते हैं। इन तीन संकेतों से वह दूसरे टाइगरों को संकेत देते हैं कि यह उनकी सीमा है। उसमें प्रवेश न करें।
…और पहले टाइगर को जान बचाने के लिए छोड़नी पड़़ती है सरहद
रेंजर्स बताते हैं कि यदि कोई ताकतवर टाइगर आकर उसी पेड़ के तने पर लगाई गई खरोंच के ऊपर दूसरी खरोंच करता है तो पहले टाइगर को वह एरिया छोड़ना पड़ता है। यदि पहला टाइगर टेरिटरी नहीं छोड़ता है तो दोनों टाइगर के मध्य जमकर युद्ध होता है और जीतने वाला उस क्षेत्र का राजा बनता है।
टाइगर की सरहद 50 किमी तक, एक बार करता है शिकार, तीन दिन तक चलता है काम
एक सीनियर रेंजर का कहना है कि एक टाइगर का एक साइड का इलाका करीब 10 किमी का होता है। ऐसे में चारों ओर उसका पूरा क्षेत्र करीब 40 किमी का होता है। यह एक फीमेल टाइगर का कॉन्सेप्ट है। वहीं नर टाइगर का एरिया 50 किमी तक का होता है। रातभर वह उस सरहद पर चलता है। शिकार करता है। रेंजर्स कहते हैं कि एक टाइगर एक बार जानवर का शिकार करता है जिसे तीन दिन तक चलाता है। कच्चा मीट खाने के कारण गर्मी भी शरीर की बढ़ती है। ऐसे में टाइगर पानी के आसपास अधिक दिखते हैं।
टाइगर अपनी टेरिटेरी बनाने के लिए पेड़ों के तनों पर पंजों से निशान करते हैं। इससे दूसरे टाइगरों को पता लग जाता है कि इस क्षेत्र में टाइगर निवास करता है। इसके अलावा टाइगर यूरिन आदि भी वहां करता है।
आरएल मीणा, मुख्य वन संरक्षण अलवर