
अलवर जिले में एक सप्ताह से तूफान व अंधड़ की आशंका ने पर्यटकों की राह भी रोक दी है। यही कारण है कि सरिस्का अभ्यारण्य में प्रतिदिन जाने वाली सफारी की संख्या एक-दो जिप्सियों तक रह गई है। वहीं एक सप्ताह पूर्व तक यह संख्या प्रतिदिन 10 से ज्यादा थी।
गत दो मई को आए तूफान ने जिले भर में बिजली, पानी सप्लाई एवं पेड़ों को ही धराशाही नहीं किया, बल्कि पर्यटन व्यवसाय को भी करारा झटका दिया है। अलवर में तूफान की तबाही देश भर में चर्चित होने के कारण पर्यटकों ने फिलहाल घूमने व पर्यटक स्थलों पर पहुंचने की योजना को टाल दिया है। तूफान का सबसे ज्यादा असर सरिस्का बाघ परियोजना में पर्यटकों की आवक पर पड़ा। दो मई को तूफान के दौरान पर्यटकों की संख्या में अचानक कमी आ गई। वहीं गत दिनों मौसम विभाग की ओर से जिले में फिर से तूफान की चेतावनी देने का भी पर्यटन पर विपरीत असर पड़ा।
पाण्डूपोल जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी घटी
सरिस्का स्थित पाण्डूपोल मंदिर के लिए प्रत्येक मंगलवार व शनिवार को श्रद्धालुओं का प्रवेश नि:शुल्क रहता है। इस कारण इन दोनों दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरिस्का में प्रवेश लेते हैं। गत मंगलवार को तूफान की चेतावनी के चलते पाण्डूपोल जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या घटकर आधी से भी कम रह गई। वहीं जंगल सफारी गत दो-तीन दिनों में नगण्य ही रही। मंगलवार को सुबह की जंगल सफारी के लिए मात्र एक जिप्सी ने सरिस्का में प्रवेश लिया। वहीं शाम को दो जिप्सी पर्यटकों को घुमाने लेकर गई। इसी प्रकार बुधवार को भी जंगल सफारी के लिए जाने वाली जिप्सियों की संख्या दो तक ही पहुंच पाई।
सरिस्का को राजस्व, जिप्सी चालकों की कमाई गई
नेचर गाइड लोकेश खंडेलवाल एवं अन्य जिप्सी चालकों का कहना है कि तूफान की आशंका के चलते पर्यटकों की संख्या में अचानक कमी आने से सरिस्का को होने वाली राजस्व में तेजी से गिरावट आई। वहीं जिप्सी चालकों व नेचर गाइडों की आमदनी भी मारी गई। यही कारण है कि इन दिनों सरिस्का में ज्यादातर जिप्सी चालक व नेचर गाइड रोजगार विहिन हैं।
Published on:
10 May 2018 10:30 am
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