अलवर. तीन महीने के बाद रविवार को सरिस्का टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की फिर से चहल पहल शुरू हो गई। पहले दिन सुबह 6.30 बजे सरिस्का के सदर, टहला एवं प्रतापबंध गेट पर सरिस्का के अधिकारियों ने पर्यटकों का तिलक लगाकर एवं माला पहनाकर स्वागत किया गया। पहले दिन पर्यटक बाघ एवं पेड़ पर चढ़े बघेरे को देख गद्गद हुए। इसी दिन डीएफओ अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव ने सदर गेट का फीता काटकर एवं वन्यजीव सप्ताह के पोस्टर का विमोचन किया। पहले दिन सरिस्का में करीब 1100 पर्यटकों ने भ्रमण किया। मानसून काल में तीन महीने सरिस्का टाइगर रिजर्व में पाण्डुपोल रूट को छोडकऱ शेष मार्ग पर सफारी पर पाबंदी थी। एक अक्टूबर को यह पाबंदी हट गई और तीनों रूटों पर सफारी शुरू हो गई।
जंगल के राजा ने भी किया पर्यटकों का स्वागत : सरिस्का में सुबह की सफारी के दौरान रूट नम्बर एक सदर गेट से प्रवेश लेने वालों का मन तब खिल उठा जब उन्हें सदर रेंज काला कुंड में युवराज यानी बाघ एसटी-21 दिखाई दिया। पर्यटकों ने बाघ को इस रूट पर आराम से चहल कदमी करते देखा। इस खूबसूरत नजारे को पर्यटकों ने मोबाइल में कैद किया और वीडियो भी बनाए। वहीं दोपहर की पारी में भी धानका वन क्षेत्र में पर्यटकों को बाघ एसटी-21 एवं पास ही पेड़ पर चढ़ा बघेरा दिखाई दिया।
बाघों की संख्या बढऩे से साइङ्क्षटग हुई सहज
सरिस्का में बाघों की संख्या निरंतर बढ़ रही है, इससे पर्यटकों को बाघों की साइङ्क्षटग आसान हो गई है। पर्यटन सीजन के पहले दिन पर्यटकों की भीड़भाड़ के बाद भी बाघ एसटी-21 की पर्यटकों को आसान साइङ्क्षटग हुई। पिछले पर्यटन सीजन में बाघों ने पर्यटको खूब लुभाया था।
जिप्सियों का रहा टोटा
सरिस्का टाइगर रिजर्व में प्रवेश खुलने के पहले ही दिन पर्यटक सफारी को आतुर दिखे, लेकिन जिप्सियों की पहले ही ऑनलाइन बुङ्क्षकग पूरी हो चुकी थी। इस कारण अनेक पर्यटकों को मायूस होना पड़ा। सोमवार को भी दोनों ही पारियों के लिए जिप्सियों की ऑनलाइन बुङ्क्षकग पहले ही हो चुकी है।