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अलवर

दो दिवसीय मत्स्य साहित्य महोत्सव का हुआ समापन

आखिर कौन है जो जेलों में बंद...विषय पर की चर्चा

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अलवर. राजगढ़ क्षेत्र के माचाड़ी कस्बा स्थित राजकीय सीनियर सैकेण्डरी विद्यालय के खेल मैदान के पास आयोजित दो दिवसीय मत्स्य साहित्य महोत्सव का समापन रविवार को हुआ।

सम्मेलन में देश के साहित्यकार लेखक, कवि एवं पत्रकारों ने भाग लिया। कायक्रम का संचालन ज्ञान चंद बागड़ी ने किया। पत्रकार एवं मानव अधिकार कार्यकर्ता मुंबई तीस्ता सीतलवाड़, राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रगतिशील लेखक संघ दिल्ली विभूति नारायण राय ने ‘बंद दरवाजे की थापेज’ (आखिर कौन है जो जेलों में बंद ) इस विषय पर चर्चा की। च्आखिर हमारी जेलों में कितने निर्दोष लोग रहते हैं और क्या-क्या यातनाएं झेल रहे हैं , हमारे देश का कानून कितने मंद गति सेे उन लोगों को न्याय दे पाता है, इसके बाद 21वीं सदी की कहानी शीर्षक पर विचार रखे गए। सम्मलेन में सतीश जयसवाल, भगवानदास मोरवाल, योगिता यादव, उमाशंकर चौधरी ने अपनी बातें रखी। आलोचना का समकाल शीर्षक पर हेतु भारद्वाज, जीवन सिंह, पंकज शर्मा ने अपने विचार रखते हुए प्रकाश डाला। इस मौके पर 21वीं सदी में लेखक की आलोचना संभावनाओं पर अनुवाद कार्यक्रम हुआ।

कार्यक्रम समापन पर कविता पाठ का संचालन अनु शक्ति सिंह ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नरेश सक्सेना एवं कविता पाठ कृष्ण कल्पित, राजीव कुमार, लोकेश कुमार, ज्योति चावला, रूपा सिंह ने किया। प्रगतिशील लेखक संघ दिल्ली के महासचिव फरहत रिजवी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में विषयों पर चिंतन और मंथन से निश्चित ही युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक ज्ञानचंद बागडी एवं सह संयोजक प्रगतिशील लेखक संघ दिल्ली के सदस्य कालूराम मीना, डॉ. कैलाश चंद्र मीणा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया।