
यूआईटी को 18 साल में महज 4 वर्ष ही मिला अध्यक्ष...अब कौन बनेगा
सरकारों का पैमाना...यूआईटी को 18 में 4 और मेवात विकास बोर्ड को 13 में 2 वर्ष ही मिल पाया अध्यक्ष
- यूआईटी भिवाड़ी को स्थापना से लेकर अब तक कोई अध्यक्ष नहीं मिल पाया, जनता ढूंढती रही प्रतिनिधि
- जिले के कुछ नेता अपना रसूख बरकरार रखने के लिए इन पदों पर चेहरे लाने की नहीं कर पाए सिफारिश
- अब भाजपा सरकार नाराज नेताओं को करेगी फिट, यूआईटी अलवर अध्यक्ष पद पर कई नेताओं की नजर
सरकार चाहे किसी की रही हो लेकिन यूआईटी अलवर को अध्यक्ष 18 साल में महज 4 ही साल मिल पाया। यही हाल मेवात विकास बोर्ड अध्यक्ष पद के लिए रहा। 13 साल में 2 वर्ष ही यहां अध्यक्ष की तैनाती की गई। हैरत की बात तो ये है कि यूआईटी भिवाड़ी को वर्ष 2003 की स्थापना से लेकर अब तक अध्यक्ष ही नहीं मिल पाया। ये सरकारों का अपना पैमाना है लेकिन इसका कारण ये भी माना जा रहा है कि पार्टियों के लीडर किसी अन्य व्यक्ति को इस पद पर बैठाकर नया लीडर नहीं बनाना चाहते थे। खैर, नई सरकार में अब नजर यूआईटी अध्यक्ष पद पर कई भाजपा नेताओं की लगी है। माना जा रहा है कि पार्टी नाराज नेताओं को इस पद पर बैठा सकती है।
देवी सिंह शेखावत दो साल ही रहे अध्यक्ष, बाकी पद रहा खाली
अलवर यूआईटी को पिछली चार सरकारों यानी 20 साल में केवल 2 साल के लिए अध्यक्ष मिला है। वसुंधरा सरकार में वर्ष 2003 से 2008 के बीच यह पद खाली रहा। वर्ष 2008 से 2013 के बीच आई अशोक गहलोत सरकार में भी यह पद लगातार 5 साल तक खाली रहा। वर्ष 2011 में प्रदीप आर्य भी करीब 2 साल चेयरमैन रहे थे। वर्ष 2013 से 2018 के बीच में आई वसुंधरा सरकार ने जनवरी 2016 में यहां देवी सिंह शेखावत को यूआईटी का अध्यक्ष बनाया। देवी सिंह शेखावत भी अक्टूबर 2018 तक ही इस पद पर रहे। वर्ष 2018 में आई अशोक गहलोत सरकार में फिर यह पद 2023 तक यानी आज तक खाली है। मालूम हो कि वर्ष 1998 से 2003 के बीच रही अशोक गहलोत सरकार ने यहां जगदीश बेनीवाल को अध्यक्ष बनाया था।
पार्टी फिट कर सकती है यहां नेताओं को
अब फिर राज्य में भाजपा की सरकार अस्तित्व में आई है। अब देखना है कि क्या इस बार इस पद पर सरकार किसी अध्यक्ष की नियुक्ति करती है या हमेशा की तरह यह चार्ज जिला कलक्टर के पास ही रहता है। जानकारों का कहना है कि भाजपा इस पद पर किसी नेता की नियुक्ति करेगी। क्योंकि लोकसभा चुनाव से पहले नाराज नेताओं को इस पद पर फिट किया जाएगा। ऐसे में कई नेता इस पद के लिए अभी से जोर लगाने लग गए हैं।
अलवर व भरतपुर की योजना भी अध्यक्ष के लिए खूब तरसी
मेवात योजना अंतर्गत राजस्थान के केवल दो जिले आते हैं। इनमें अलवर और भरतपुर शामिल है लेकिन बोर्ड गठन के बाद आधे से ज्यादा समय तक कोई अध्यक्ष ही नहीं मिला। वर्ष 2003 से 2008 के दौरान वसुंधरा सरकार के दौरान कार्यकाल के अंत में अलवर के नसरू खान को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद वर्ष 2008 से 2013 तक अशोक गहलोत सरकार में अध्यक्ष का चार्ज ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री के पास रहा। इसके बाद 2013 से 2018 के दौरान वसुंधरा सरकार में यह चार्ज ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री के पास ही रहा। वर्ष 2018 में अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल के अंत में वर्ष 2022 में मेवात विकास बोर्ड का अध्यक्ष अलवर निवासी कांग्रेस नेता जुबेर खान को बनाया गया।
Published on:
10 Dec 2023 11:23 am
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