
Victim fathers said Baba makes tantra mantra
हीरेन जोशी. अलवर.
फलाहारी बाबा पर एफआईआर दर्ज कराने वाली पीडि़ता के परिजन कड़ी सुरक्षा के बीच अलवर में मौजूद हैं। उनके पिता ने राजस्थान पत्रिका से अपनी पीड़ा साझा की। कुछ सवालों के जवाब भी दिए। उनका कहना है कि बाबा सम्मोहन करते हैं। उनके सम्मोहन में ही फंस कर ही हम अंध भक्त बन गए थे। जिसका खामियाजा इस कदर भुगतना पड़ेगा, यह सपने में भी नहीं सोचा था। इस पीड़ाजनक हालाता में भी उन्होंने लोगों को सुझाव दिया है कि ऐसे बाबाओं से बच कर रहें। जरूरी ही है तो पूरी पड़ताल करके ही किसी से जुड़ें।
पत्रिका से विशेष बातचीत
सवाल- बाबा से पहला परिचय कब हुआ? आप बच्ची को आश्रम क्यों भेजते थे?
जवाब- बाबा से परिचय 1986 में परिचय हुआ। समाज में आना जाना था। तब परिचय हुआ। सब लोग मानते थे इसलिए हमने भी मानना शुरू कर दिया। इस बच्ची को बाबा ने गोद में भी खिलाया है। उनका घर पर आना जाना था। हम उनके अंधभक्त थे इसलिए अवश्विास का सवाल ही नहीं था? उन्होंने ही सुप्रीम कोर्ट के वकील के यहां इंटर्नशिप करवाई थी। घटना वाले दिन वह अपनी पहली कमाई का चैक उन्हें देने गई थी।
सवाल- आप अब पछता रहे हैं। पहले बाबा को समझ क्यों नहीं पाए?
जवाब- बाबा तंत्र-मंत्र करते थे। हमारे ऊपर सम्मोहन कर दिया था। उनके आगे जाते ही और कुछ सूझता ही नहीं था। इसके कारण हम प्रभावित होते थे।
सवाल- कैसी माया करते थे?
जवाब- मैंने कहा कि वे सम्मोहित कर देते थे। वे सामने होते थे बस एक आकर्षण रहता था। मेरे जैसे कई लोग हैं जो इस सम्मोहन में बंधे रहे हैं।
सवाल- प्राथमिकी के हिसाब से बाबा की किसी अन्य पर भी बुरी नजर थी?
जवाब- ऐसे कई लोग हैं। उस समय उन्होंने हमारी पत्नी से भी कहा कि हम एक वारिस देना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने ऑपरेशन तक खुलवाने के लिए कहा और बोले कि हम ऐसी जड़ी बूटी देंगे जिससे वारिस मिल जाएगा। हालांकि हमने साफ मना कर दिया। तब हम समझ नहीं पाए कि उनकी नियत क्या है।
सवाल- बाबा के प्रभाव को देखते हुए आपको लगता है कि कार्रवाई होगी? यहां कोई दबाव?
जवाब- हम जब यहां आए थे तो इसी दहशत में थे कि क्या होगा? यहां आने के बाद पुलिस, प्रशासन और मीडिया से जो सहयोग मिला है उससे हमारा हौसला बढ़ गया है। यहां जिस तरह से हमें सुरक्षा दी गई है ऐसे में कोई आस-पास भी नहीं आ सकता है। पूर्ण विश्वास है कि न्याय मिलेगा।
सवाल- कुछ लोग कह रहे हैं कि लेन देन का भी कोई मामला है?
जवाब- मुझे इनसे क्या लेना होगा? मैंने 50 लाख रुपए से भी अधिक का सहयोग किया है। हमने दान ही दिया है। कुछ भी लेने की इच्छा नहीं थी।
सवाल- आपने अंधविश्वास में चोट खाई है। अन्य अभिभावकों के लिए क्या संदेश देंगे?
जवाब- मेरा सुझाव है कि हमें यदि कोई गुरु बनाना ही है तो पूरी खोज खबर लें। वह आदमी कैसा है? इसका पता किया जाए। जैसे कहीं विवाह संबंध करने से पहले पड़ताल की जाती है वैसे ही यहां भी लें।
Updated on:
22 Sept 2017 11:15 pm
Published on:
22 Sept 2017 10:12 pm
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