ग्रामीण अंचल में ऐसे कई गांव हैं, जहां धीमा जहर के रूप में लोगों को फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसका परिणाम यह है कि वे शारीरिक रूप से क्षीण होने के साथ कई बीमारियों से पीडि़त भी होते जा रहे हैं।
कोटकासिम (भिवाड़). उपखंड के ग्रामीण अंचल में ऐसे कई गांव हैं, जहां धीमा जहर के रूप में लोगों को फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसका परिणाम यह है कि वे शारीरिक रूप से क्षीण होने के साथ कई बीमारियों से पीडि़त भी होते जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार इलाकों में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से की जा रही जलापूर्ति वाले पानी में फ्लोराइड की मात्रा बहुत अधिक है। जिसका सेहत पर बहुत खतरनाक प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन लोग यही पानी पीने को मजबूर हैं। इस पानी के लगातार सेवन से लोगों दांत पीले पड़ रहे हैं तो हड्डियों व जोड़ों की विभिन्न बीमारियों की चपेट में आने लगे हंै। आसपास के कई गांवों में भी भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। फ्लोराइडयुक्त पानी के लगातार सेवन से धीमा जहर जैसा साबित हो रहा है। वैसे तो जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को इसकी जानकारी है, लेकिन अब तक इसे नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। जिसके चलते लोगों को स्वच्छ पेयजल नहीं मिल पा रहा है।
नहीं होनी चाहिए फ्लोराइड की मात्रा अधिक
चिकित्सकों के अनुसार पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा प्रति लीटर 0.75 मिली ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद कोटकासिम तथा आसपास के गांवों के भूमिगत जल में पाई जाने वाली फ्लोराइड की मात्रा का प्रतिशत काफी अधिक होने के साथ चौंकाने वाला है। क्षेत्र में भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा 0.75 की तुलना में 5.64 मिलीग्राम प्रतिलीटर पाई गई है। कई स्थानों पर तो 2.6 मिलीग्राम प्रतिलीटर तक है। इसके अलावा क्षेत्र के अन्य विभागों में भी पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा 0.75 से भी अधिक पाई गई है। यह स्वास्थ्य के लिए बहुज ही हानिकारक है। फ्लोराइड के अलावा पेयजल में पाई जाने वाली डीसाल्वड सोलवेंट टीडीएस की मात्रा भी स्वास्थ्य के लिए सीधे तौर पर प्रभावित करती है। दंत चिकित्सक ललित शर्मा ने बताया कि पीने के पानी में टीडीएस की मात्रा न्यून्तम 500 मिलीग्राम प्रतिलीटर से लेकर अधिकतम 1500 मिलीग्राम होनी चाहिए। पेयजल में टीडीएस की अधिक मात्रा मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। डॉ. रूपेश चौधरी पेयजल में फ्लोराइड व टीडीएस की मात्रा अत्यधिक होने के कारण लोगों के दांतों सहित शरीर में कई बीमारियां हो जाती है। हड्डियों तथा जोड़ों के रोगियों की संख्या निरन्तर बढ़ रही है।