
अलवर . शहर में वाटर रिचार्ज को लेकर कोई इंतजाम नहीं हैं। बारिश होती है और पानी जमीन में जाने के बजाय सड़कों से बहता हुआ नालियों में चला जाता है। इस अमूल्य पानी को जमीन के अंदर पहुंचाने के लिए पेविंग ब्लॉक की सड़कें बनाने की तैयारी की जा रही है। शहर के कुछ पार्षदों ने इस सड़क का अध्ययन करने के बाद निगम प्रशासन को इस तरह की सड़कें बनाने का सुझाव दिया है। भोपाल नगर निगम क्षेत्र में ये सड़कें बनाई जा रही हैं। पार्षदों का कहना है कि इस सड़क के कई फायदे हैं। निगम का खजाना भी खाली नहीं होगा और वाटर रिचार्जिंग भी होगी। इससे जल संकट से निपटा जा सकता है। नेता प्रतिपक्ष विक्रम यादव ने कहा कि एक बार भोपाल नगर निगम की इस कार्यप्रणाली को जाकर देखना चाहिए। पार्षदों को भी टीम में शामिल किया जाए।
- 6 से 7 फीट चौड़ी व एक किमी लंबी सीसी रोड बनाने में 1.15 करोड़ तक का खर्च आता है, जबकि पेविंग ब्लॉक सड़क पर 80 से 85 लाख का खर्च आएगा।
- सीसी व डामर की सड़क गर्मी में एक डिग्री तक तापमान में वृद्धि कर सकती है, जबकि पेवर्स वाली सड़क जल्दी गर्म होकर जल्दी ठंडी होगी।
- पेविंग ब्लॉक वाली सड़क की उम्र 8 से 10 साल होती है।
- पेविंग ब्लॉक के बीच में जगह होने के कारण बारिश का पानी रिसकर जमीन में जाएगा।
- सीसी सड़क पुरानी होने पर उसी पर लेयर चढ़ा दी जाती है, जबकि पेवर्स वाली सड़क के ब्लॉक हट जाएंगे।
- सीसी रोड की स्ट्रेंथ एम-40 तक होती है, जबकि पेवर्स वाली सड़क की एम-20। ब्लॉक से तैयार सड़क मजबूत है। टिकाऊ है। इसकी लागत कम आती है। एरिया भी सुंदर होता है। श्याम सुंदर, आर्किटेक्ट
Updated on:
04 May 2024 11:17 am
Published on:
04 May 2024 11:16 am
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