अलवर. राजस्थान रोडवेज की बसें 'डग्गेमारी' वाहन से कम नहीं हैं। अलवर जिले में रोडवेज बसों में ना फर्स्ट एड बाॅक्स हैं और ना ही अग्निशमन सिलेंडर। ऐसे हालात में रोडवेज बसों में कभी हादसा हो सकता है, लेकिन रोडवेज प्रबंधन यात्रियों के जान-माल के खतरे को नजर अंदाज कर इन बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करा सड़कों पर दौड़ा रहा है।
- जिले के तीनों आगार की रोडवेज बसों में नहीं सुरक्षा उपकरण
- रोडवेज प्रशासन ने जयपुर से जारी कराया बसों का फिटनेस सर्टिफिकेट
अलवर. राजस्थान रोडवेज की बसें 'डग्गेमारी' वाहन से कम नहीं हैं। अलवर जिले में रोडवेज बसों में ना फर्स्ट एड बाॅक्स हैं और ना ही अग्निशमन सिलेंडर। ऐसे हालात में रोडवेज बसों में कभी हादसा हो सकता है, लेकिन रोडवेज प्रबंधन यात्रियों के जान-माल के खतरे को नजर अंदाज कर इन बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करा सड़कों पर दौड़ा रहा है।
अलवर जिले के राजस्थान रोडवेज के अलवर, मत्स्य नगर और तिजारा डिपों हैं। इन तीनों डिपो में करीब 250 रोडवेज बसें हैं। इनमें आधे से ज्यादा बसें 10 साल या उससे अधिक पुरानी हैं, जो कि अपने 10 लाख किलोमीटर पूरे कर चुकी हैं। तीनों आगारों की अधिकांश बसें ऐसी हैं, जिनमें फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं हैं। इनमें बसों में फर्स्ट एड बॉक्स ही हटा दिए गए हैं। कुछेक बसों में फर्स्ट एड बॉक्स तो हैं, लेकिन उनमें प्राथमिक उपचार के लिए दवा, पट्टी और डिटॉल आदि कुछ भी नहीं रखा हुआ है। वहीं, अधिकांश बसों में अग्निशमन सिलेंडर नहीं लगे हुए हैं। बसों से अग्निशमन सिलेंडर हटाकर रख दिए हैं तथा कई बसों में अग्निशमन सिलेंडर तो लगे हैं, लेकिन एक्सपायरी डेट के हैं या फिर वे खाली पड़े हैं।
बसों में स्पीड गवर्नर तक नहीं
अलवर जिले में वर्ष 2012, 2013, 2017 और 2020 मॉडल की बसें हैं। इनमें से किसी भी बस में स्पीड गवर्नर नहीं लगा हुआ है। पुरानी गाडि़यों स्पीड गवर्नर नहीं लगे हुए थे। नई गाडि़यों में स्पीड गवर्नर लगे हुए थे, लेकिन उन्हें भी गाडि़यों से हटाकर रख दिया गया है। स्पीड गवर्नर से बसें एक निर्धारित गति सीमा से तेज नहीं दौड़ पाती हैं।
रखवा दिए जाएंगे
बसों में फर्स्ट एड बॉक्स पहले रखवाए गए थे। जिन बसों में फिलहाल फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशमन सिलेंडर नहीं हैं। उनमें रखवा दिए जाएंगे।
- हेमंत शर्मा, मुख्य प्रबंधक, मत्स्य नगर आगार, अलवर।