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अलवर लोकसभा चुनाव से जीत की किसकी बारी

अलवर लोकसभा सीट से भाजपा ने लगातार 7वें चुनाव में भी चेहरा बदला है। केंद्र में वन एवं पर्यावरण व श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव पर दांव लगाया है। मूलत: अजमेर के रहने वाले यादव राज्यसभा से दो बार लगातार सांसद रहे हैं। राजनीति में अच्छा अनुभव है। राजनीतिक पंडित कहते हैं कि भाजपा की ओर से हर बार चेहरा बदलना मुफीद साबित हुआ है।

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अलवर

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susheel kumar

Mar 03, 2024

अलवर लोकसभा चुनाव से जीत की किसकी बारी

अलवर लोकसभा चुनाव से जीत की किसकी बारी

लगातार 7वें लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने बदला चेहरा...भूपेंद्र यादव पर लगाया दांव
- अजमेर निवासी भूपेंद्र यादव केंद्र में श्रम मंत्री, दो बार के राज्यसभा सांसद, राजनीति का अच्छा अनुभव

- भाजपा 1999 से लगातार यादव चेहरों पर लगाती आ रही है दांव, यहां इस बिरादरी के करीब 4.50 लाख वोट
- छह बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली है 3 बार जीत, बाहरी प्रत्याशी दो बार लाए, मिली जीत

अलवर लोकसभा सीट से भाजपा ने लगातार 7वें चुनाव में भी चेहरा बदला है। केंद्र में वन एवं पर्यावरण व श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव पर दांव लगाया है। मूलत: अजमेर के रहने वाले यादव राज्यसभा से दो बार लगातार सांसद रहे हैं। राजनीति में अच्छा अनुभव है। राजनीतिक पंडित कहते हैं कि भाजपा की ओर से हर बार चेहरा बदलना मुफीद साबित हुआ है। 6 चुनाव में से पार्टी को 3 में जीत मिली है। यहां से टिकट जारी होने के बाद भाजपाइयों ने नंगली सर्किल पर जश्न मनाया। आतिशबाजी की।

यादव वोटर साढ़े चार लाख, तय करते हैं प्रत्याशियों का भविष्य
काफी समय से कयास लगाए जा रहे थे कि पार्टी कई चेहरों पर मंथन कर रही है लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा भूपेंद्र यादव की ही रही। अलवर में 8 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। यहां यादव वर्ग के करीब साढ़े चार लाख वोटर हैं। ऐसे में भाजपा हर बार यादव चेहरे पर ही दांव लगाती आ रही है। इस बार भी वही किया। पूर्व अनुभव का सहारा लेते हुए उन्होंने यादव चेहरा लोगों के सामने रखा।

इस तरह मैदान में भाजपा ने उतारे चेहरे
वर्ष 1999 में भाजपा ने डॉ. जसवंत यादव को मैदान में उतारा और वह जीते भी। इसी तरह वर्ष 2004 के चुनाव में महंत चांदनाथ को चुनावी रण में लाया गया लेकिन वह 8 हजार वोट से हार गए। इसी तरह वर्ष 2009 में डॉ. किरण यादव को प्रत्याशी बनाया और वह करीब एक लाख वोटों से हार गईं। वर्ष 2014 मेें पार्टी ने महंत चांदनाथ को फिर से टिकट दिया और उन्होंने जीत दर्ज की। वर्ष 2017 में उनका निधन हो गया तो उपचुनाव हुए। पार्टी ने डॉ. जसवंत यादव को उतारा लेकिन वह कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. करण सिंह से हार गए। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव में पार्टी ने महंत बालकनाथ पर दांव खेला और उन्होंने कांग्रेस के जितेंद्र सिंह को करीब साढ़े तीन लाख वोटों से हराया। ये भाजपा की बड़ी जीत थी।

25 साल से लगातार चेहरा बदल रही पार्टी
पार्टी ने वर्ष 2019 की जीत के आंकड़े को आधार मानते हुए ही भूपेंद्र यादव को यहां का चेहरा बनाया। राजनीतिक पंडित कहते हैं कि यहां यादव बिरादरी ही निर्णायक होती है। यहां मुस्लिम वोटरों की संख्या करीब 5 लाख है। एससी-एसटी के भी 4 लाख वोट हैं। ब्राह्मण वर्ग के वोटों की संख्या भी करीब 4 लाख ही है। भाजपा ने वर्ष 1999 से लगातार 25 वर्ष से लोकसभा चुनाव में यादव चेहरा ही मैदान में उतारा है। अधिकांश बार उन्हें सफलता मिली है। वहीं कांग्रेस ने भी दो बार यादव चेहरा उतारा और जीत दर्ज की।

ये है वर्तमान िस्थति
अलवर लोकसभा में 8 विधानसभाएं आती हैं। 5 विधानसभाओं में कांग्रेस के विधायक हैं। जिसमें अलवर ग्रामीण से टीकाराम जूली, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ से मांगीलाल मीणा, मुंडावर से ललित यादव, किशनगढ़बास से दीप चंद खेरिया व रामगढ़ से जुबेर खान हैं। वहीं भाजपा के पास 3 विधायक हैं। इसमें अलवर शहर से संजय शर्मा, बहरोड़ से जसवंत यादव व तिजारा से महंत बालक नाथ हैं। बानसूर विधानसभा जयपुर ग्रामीण लोकसभा में आती है। वहीं कठूमर व थानागाजी विधानसभा भरतपुर व दौसा लोकसभा में लगती हैं।

कांग्रेस ला सकती है गैर यादव चेहरा
भाजपा ने यादव चेहरे पर दांव खेला है। राजनीतिक पंडित कहते हैं कि पार्टी यहां से गैर यादव चेहरा भी ला सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ब्राह्मण चेहरा भी यहां से उतारा जा सकता है। हालांकि कांग्रेस में यादव चेहरे के रूप में संदीप यादव, ललित यादव व करण सिंह यादव का नाम चल रहा है। खुद कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र सिंह भी मैदान में आ सकते हैं।

बाहरी चेहरे को अलवर की जनता ने स्वीकारा
लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इससे पहले भी बाहरी चेहरे को टिकट दिया था और अलवर की जनता ने उन्हें स्वीकारा। पार्टी के जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता का कहना है कि हमारी तैयारी पूरी है। जीत दर्ज करेंगे।