
मत्स्य विश्वविद्यालय परिसर में पड़े बोर्ड पर जमा गंदगी।
अलवर. युवाओं को जागरुकता का पाठ पढ़ाने वाला मत्स्य विश्वविद्यालय का प्रशासन खुद ही जागरुक नहीं है। वह लोगों को नहीं बता पा रहा कि विश्वविद्यालय यहीं पर है। क्योंकि विश्वविद्यालय के बाहर न कोई बोर्ड और न ही कोई अन्य चिन्ह। बाहर से आने वाले लोग मत्स्य विश्वविद्यालय को ढूंढते ही रह जा रहे हैं। एक बोर्ड यहां लगा था जो जमीन में धंस चुका है।
मत्स्य विश्वविद्यालय का अपना नया भवन हल्दीना में बनकर तैयार हो गया, लेकिन यह शिफ्ट नहीं हो पाया। वर्तमान में यह कला कॉलेज में संचालित है। शुरुआत में इस विश्वविद्यालय के बाहर एक बोर्ड लगाया गया था जिसमें विश्वविद्यालय का नाम लिखा था। हर कोई यहां आता तो पहचान लेता था कि यहीं उच्च शिक्षा मिलती है। अब हालात अलग हैं। यहां लगाया गया बोर्ड जमींदोज हो चुका है। लोगों को ढूंढने से भी विश्वविद्यालय नहीं मिल रहा।
करोड़ों का बजट पर बोर्ड के कुछ पैसे नहीं खर्च पा रहे : विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं के लिए सरकार की ओर से हर साल करोड़ों रुपए आते हैं लेकिन एक बोर्ड के लिए कुछ रुपए खर्च नहीं कर पा रहे हैं जबकि कई बार छात्रों से लेकर दूसरे लोगों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के जिम्मेदारों को अवगत कराया। लोगों का कहना है कि छोटे से छोटे स्कूल पर भी बोर्ड लगा होता है यह तो विश्वविद्यालय है।
भवन तैयार पर शिफ्ट कब होगा पता नहीं
विश्वविद्यालय का नया भवन बने काफी समय हो गया है। नया भवन भी अब पुराना जैसा लगने लगा है लेकिन शिफ्ट कब होगा यह किसी को नहीं पता। वर्तमान कला कॉलेज भवन जर्जर की स्थिति में है।
विश्वविद्यालय के गेट के बोर्ड पर मेरी नजर नहीं पड़ी है। यह भवन कला कॉलेज का है। इसको दिखवाकर नियमानुसार बोर्ड दोबारा लगवा दिया जाएगा।
- डॉ दयाचंद डागुर, प्रभारी सामान्य प्रशासन, मस्त्य विश्वविद्यालय अलवर।
Published on:
15 Mar 2023 02:05 am
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