
अलवर. नगर निगम व यूआइटी का सर्वे पूरा हो गया है। 14 हजार भवन ऐसे मिले हैं, जिनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। पहले चरण में 10 हजार भवनों पर लगाया जाएगा। भूजल विभाग कम लागत वाले सिस्टम के बारे में संबंधित लोगों को जानकारी देगा। दो माह में यह सभी सिस्टम लग जाएंगे।
जल संकट से जूझ रहे शहर को उबारने के लिए प्रशासन ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की योजना बनाई है। इसके लिए पहले शहर के भवनों का सर्वे नगर निगम व यूआइटी से करवाया गया। इस सर्वे में आवासीय भूखंड 224 वर्ग मीटर या इससे अधिक एरिया वाले लिए गए हैं। साथ ही कमर्शियल में 500 वर्ग मीटर से ज्यादा वाले भवनों का चयन किया गया है। इन लोगों को नगर निगम व यूआइटी की टीम ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के बारे बताया। कम लागत वाले सिस्टम की जानकारी भूजल विभाग देगा। इसके अलावा जिले के सभी तीन हजार से अधिक सरकारी कार्यालयों में विभागीय फण्ड, सीएसआर व जनसहभागिता से यह सिस्टम लगाए जाएंगे। इसके लिए विभागों को 15 दिन का समय दिया गया है। तकनीकी सहायता के लिए जल संसाधन खंड को भी जिम्मेदारी दी गई है। गौरतलब है कि अलवर में पानी के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। सतही पानी खत्म हो चुका है और भूजल स्तर हर साल बारिश में बढ़ता है, लेकिन दोहन ज्यादा होने की वजह से इसमें भी कमी आ रही है। अगर छतों का यह पानी जमीन में जाएगा तो भूजल स्तर पर में जबर्दस्त इजाफा होने की उम्मीद है।
यूआइटी ने बनवाए सात ढांचे
यूआइटी ने कुछ समय पहले ही काली मोरी, नेहरू गार्डन, अरावली विहार प्रथम, द्वितीय के अलावा पटरी पार एरिया में तीन रेन वाटर हार्वेस्टिंग ढांचे तैयार किए हैं। इसी तरह के ढांचे अन्य जगहों पर बनाने के लिए स्थान देखें जा रहे है, ताकि बारिश के पानी को संजोया जा सके।
Updated on:
19 Apr 2026 11:58 am
Published on:
19 Apr 2026 11:57 am
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