रोडवेज बसों के शीशों पर कोहरा न जमे, इसके लिए चालक शीशों पर रगड़ रहे सिगरेट का जर्दा
अलवर. कोहरे में दुर्घटनाओं से बचने के लिए रोडवेज प्रशासन के कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे में चालक खुद ही देशी जुगाड़ कर कोहरे में दुर्घटनाओं से बचने का प्रयास कर रहे हैं। रोडवेज के कई पुराने चालक इन दिनों गाडिय़ों के शीशों पर सिगरेट का जर्दा रगड़ रहे हैं ताकि कोहरे के दौरान शीशा चमकता रहे और उस पर कोहरा नहीं जमे।
अलवर और मत्स्य नगर आगार में करीब 200 रोडवेज बसें हैं। तेज सर्दी और कोहरे में चालकों को रोडवेज बसें चलाने में परेशानी आ रही है। काफी गाडिय़ों के शीशे तो काफी पुराने हो चुके हैं और उनकी पूरी चमक खत्म हो चुकी है। जिसके कारण कोहरे में इन बसों के शीशों पर कोहरे की ओस जमा हो जाती है और चालक को सामने कुछ दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में दुर्घटना का खतरा ज्यादा बना रहता है। दुर्घटनाओं के खतरे से बचने के लिए रोडवेज के कई पुराने चालक कोहरे के दौरान बसों के फ्रंट शीशे पर सिगरेट का जर्दा रगड़ रहे हैं।
रोडवेज चालकों का कहना है कि जर्दा रगडऩे से गाडिय़ों के शीशे चमकते रहते हैं। शीशे काफी फिसलने हो जाते हैं। इससे शीशों पर कोहरे में ओस जमा नहीं होती है और पानी शीशे पर नहीं रुकता है। जिसके कारण कोहरे में भी शीशा साफ रहता है और चालक को गाड़ी चलाने में परेशानी नहीं आती है।
रोडवेज बसों पर फॉग लैम्प तक नहीं
पिछले कई दिनों से कड़ाके की सर्दी पड़ी रही है। अलसुबह और रात को शहर से बाहर निकलते ही ग्रामीण इलाकों और हाइवे पर घना कोहरा छाया रहता है। कोहरे के कारण रोडवेज चालकों को बसें चलाने में परेशानी आ रही है, लेकिन रोडवेज प्रशासन की ओर से बसों में फॉग लैम्प तक नहीं लगाए हुए हैं। कुछ चालक और परिचालकों ने रोडवेज बसों की हैडलाइट पर पीली पन्नी चिपकाई हुई है ताकि कोहरे में फॉग लाइट का काम कर सके।
अलग से फॉग लैम्प नहीं लगाए
मत्स्य नगर आगार अलवर के मुख्य प्रबंधक हेमंत शर्मा का कहन है कि रोडवेज बसों में ऑरिजनल हैडलाइट लगी हुई हैं, जो कि पीली रोशनी वाली हैं। बसों में अलग से कोई फोग लैम्प नहीं लगाए हुए हैं।