
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने अंबाला नगर निगम को भंग कर दिया है। मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। अब अंबाला शहर और अंबाला सदर पहले की तरह अलग-अलग नगर परिषद के रूप में संचालित होंगे। हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज लंबे समय से अंबाला नगर निगम को भंग करने की मांग कर रहे थे। हालांकि मंत्री समूह की बैठक में इस मुद्दे पर पहले ही सहमति बन चुकी थी लेकिन शनिवार को मंत्रिमंडल की बैठक में इस फैसले पर मोहर लगाकर लागू कर दिया गया है।
सरकार का मानना है कि अंबाला शहर क्षेत्र और अंबाला सदर क्षेत्र के लिए अलग नगर निकाय अंबाला सदर क्षेत्र के लोगों को समय, दूरी और लागत में कमी के कारण विभिन्न नगरपालिका सेवाओं का लाभ उठाने की अधिक सुविधाजनक साबित होंगे। इसके अलावा, भारतीय सेना के स्टेशन सेल वाले अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड के सैन्य स्टेशन और छावनी क्षेत्रों ने अंबाला सदर क्षेत्र के साथ अंबाला शहर के इलाके की भौगोलिक निरंतरता को भी तोडा है क्योंकि छावनी क्षेत्र इन दोनों क्षेत्रों में आता है। इसके अतिरिक्त, ये दोनों क्षेत्र दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में आते हैं।
सरकार द्वारा यह फैसला करने से पहले निकाय विभाग के अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट भी मंगवाई गई थी। जिसमें कहा गया था कि अंबाला सदर का शहर अंबाला सिटी के मुख्य नगर निगम कार्यालय से लगभग 10 से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निगम के आयुक्त और सभी शाखा प्रमुखों के कार्यालय भी मुख्य कार्यालय में स्थित हैं। इसके अलावा, अंबाला सदर क्षेत्र के 15 गांवों में से अधिकांश मुख्य निगम कार्यालय से दूर स्थित हैं और अधिकतर नगरपालिका कार्यों और शिकायतों के निवारण के लिए अबाला सदर क्षेत्र के लोगों को अंबाला शहर में निगम कार्यालय का दौरा करना पड़ता है।
नगर निगम से संबंधित कार्यों के अलावा अन्य कार्यों के लिए अंबाला सदर क्षेत्र के लोगों को एसडीएम, तहसीलदार, पुलिस, बिजली, जन स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विभिन्न उप-मंडल कार्यालय में जाना पड़ता है जो अंबाला सदर में स्थित हैं। इसी तरह, अंबाला शहर क्षेत्र के लोगों के पास अंबाला शहर में अलग उप-मंडल कार्यालय हैं। जनगणना 2001 और 2011 के अनुसार, अंबाला शहर क्षेत्र की जनसंख्या क्रमश: 1,39,279 और 1,95,153 थी। इसी प्रकार, इन दो वर्षों के लिए अंबाला सदर क्षेत्र की जनसंख्या क्रमश: 1,06,568 और 1,70,223 थी।
नगर निगम को जारी रखना आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं था। वित्त वर्ष 2016-17 के लिए नगर निगम अंबाला की आय 51.15 करोड़ रुपये थी। इसके विरूद्घ अपने स्वयं के प्रतिष्ठान प्रभारों जैसे अपने कर्मचारियों का वेतन, भविष्य निधि शेयर, पेंशन, ग्रैच्युटी और अन्य स्थानीय एवं अनिवार्य दायित्व जैसे लेखा परीक्षा शुल्क, उनके द्वारा अनुबंधित ऋणों का पुनर्भुगतान करने के लिए निगम का खर्च 51.19 करोड़ रुपए था, जो कि आय का 100.08 प्रतिशत है। इसी तरह, वित्त वर्ष 2015-16 के लिए, व्यय आय का 104.89 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2010-11 से 2016-17 तक निगम की आय और व्यय विवरण यह बताते हैं कि वित्त वर्ष 2013-14 को छोडक़र नगर निगम, अंबाला का खर्च कुल आय के 80 प्रतिशत से अधिक था। जिसके आधार पर आज यह फैसला लिया गया है।
Published on:
19 Feb 2018 10:09 pm
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