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(चंडीगढ़,अंबाला): हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर हटाए गए आईपीएस के.पी. सिंह को फिर से हरियाणा पुलिस की कमान मिल गई है। नए डीजीपी की नियुक्ति तक केपी सिंह डीजीपी की जिम्मेदारी संभालेंगे। सरकार ने केपी सिंह को हरियाणा के डीजीपी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। मौजूदा डीजीपी बीएस संधू का कार्यकाल पूरा होने पर यह फैसला लिया गया है।
हरियाणा सरकार ने केंद्रीय लोकसेवा आयोग के पास सीनियर आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल भेज रखा है। राज्य सरकार हालांकि अपने स्तर पर डीजीपी की नियुक्ति करना चाहती थी। इसके लिए विधानसभा में कानून भी बनाया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए केंद्रीय लोक सेवा आयोग के माध्यम से ही डीजीपी की नियुक्ति के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद प्रदेश सरकार को नए डीजीपी का नाम फाइनल होने का इंतजार है।
गृह सचिव एसएस प्रसाद ने बृहस्पतिवार रात को बीएस संधू को अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया था, लेकिन शुक्रवार दोपहर केपी सिंह को अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने के आदेश जारी हो गए। केपी सिंह फिलहाल डीजीपी राज्य मानवाधिकार आयोग के पद पर कार्यरत हैं। केपी सिंह डीजीपी जेल भी रह चुके हैं। माना जा रहा है कि राज्य सरकार उन्हें इसी पद पर कंटीन्यू करा सकती है।
विधानसभा स्पीकर के साथ भी विवाद हुआ समाप्त
आईपीएस केपी सिंह जब हरियाणा के पुलिस महानिदेशक थे तो उनका विधानसभा के स्पीकर कृष्ण पाल गुर्जर के साथ विवाद चल रहा था, जिसके अब सुलझ जाने की खबरें हैं। केपी सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रहने वाले हैं। सहारनपुर और यमुनानगर जिलों की सीमा आपस में लगती है। दोनों के बीच विवाद का कारण राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चित रहा। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर तथा अवतार सिंह भड़ाना व करतार सिंह भड़ाना समेत कई गुर्जर नेताओं ने दोनों का विवाद हल कराने में अहम भूमिका निभाई है, जिसके बाद सरकार ने केपी सिंह पर फिर से भरोसा जताया है।
Published on:
01 Feb 2019 07:16 pm
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