
हरियाणा में विधायकों को भी हैं इंसाफ की दरकार
चंडीगढ़। आम जनता को अगर प्रशासनिक अधिकारियों से इंसाफ नहीं मिलता है तो वह अपने चुने हुए जनप्रतिनिधि अथवा विधायक के दरबार में जाते हैं लेकिन हरियाणा में अफसरशाही की कोताही का आलम यह है कि विधायकों को भी उनसे इंसाफ नहीं मिलता है। जिसके चलते उन्हें ऐसे मुद्दे सार्वजनिक प्लेटफार्म पर उठाने पड़ते हैं।
ताजा मामला पानीपत का है। जहां की विधायक ने इंसाफ के लिए जिला शिकायत निवारण कमेटी के समक्ष गुहार लगाई है। दिलचस्प बात यह है कि विधायक ने जिस कमेटी में शिकायत दर्ज करवाई है वह खुद इस कमेटी की सदस्या हैं।
हरियाणा सरकार द्वारा लोगों की शिकायतों का निवारण करने के लिए जिला स्तर पर शिकायत निवारण कमेटियों का गठन किया गया है। इन कमेटियों का अध्यक्ष एक कैबिनेट मंत्री को बनाया गया है। जिला के सभी विधायक इस कमेटी के सदस्य होते हैं। लिहाजा इस कमेटी की बैठक में आने वाली शिकायतों पर मंत्री तथा विधायक मिलकर फैसला करते हैं और फरियादियों को मौके पर ही न्याय दिया जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि यह है कि लोगों को इस समीति के माध्यम से न्याय दिलाने वाली विधायक ने खुद फरियादी के रूप में शिकायत दर्ज करवाई है। पानीपत में जिला शिकायत निवारण कमेटी के अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री अनिल विज हैं। पानीपत में जिला कष्ट निवारण समीति की बैठक 29 जून को है।
जिसमें रोहिता रेवड़ी ने प्रशासनिक अधिकारियों पर मिलीभुगत करके यहां के तहसील कैंप इलाके में अवैध कब्जे करवाने का आरोप लगाया है। विधायक का तर्क है कि वह इस मामले में कई बार कार्रवाई करने के लिए बोल चुकी हैं लेकिन प्रशासनिक अधिकारी कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं। विधायक रोहिता रेवड़ी ने अपने क्षेत्र में एक निजी क्षेत्र की कंपनी के विरूद्ध भी शिकायत दर्ज करवाई है।
उमेश अग्रवाल भी उठा चुके हैं ऐसे ही शिकायत
हरियाणा में भाजपा विधायकों द्वारा अपनी ही सरकार में अफसरशाही द्वारा सुनवाई न किए जाने पर अपनी समस्या शिकायत निवारण कमेटी में उठाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले गुरुग्राम के विधायक एवं वर्तमान में भाजपा के मीडिया प्रभारी उमेश अग्रवाल भी अपने क्षेत्र की समस्या उसी शिकायत निवारण कमेटी में उठा चुके हैं जिसमें वह लोगों को इंसाफ देने के लिए बतौर सदस्य तैनात हैं।
Published on:
28 Jun 2018 10:13 pm
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