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Krishna Janmashtami 2024: 93 साल पुराना है राधा-वल्लभ मंदिर का इतिहास, जन्माष्टमी पर उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़

Krishna Janmashtami 2024: सरगुजा महाराजा रामानुज शरण सिंहदेव ने अपनी माता के लिए पैलेस प्रांगण में राधा वल्लभ मंदिर का वर्ष 1931 में कराया था निर्माण

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Krishna Janmashtami 2024

अंबिकापुर. Krishna Janmashtami 2024: भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सोमवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए मंदिरों में तैयारियां लगभग पूर्ण कर ली गई हंै। मंदिरों को आकर्षक तरीके से सजाया जा रहा है। अंबिकापुर में सबसे प्राचीन राधा-वल्लभ मंदिर में भी तैयारी चल रही है। यह मंदिर 93 वर्ष पुराना है। मंदिर का निर्माण राज परिवार द्वारा वर्ष 1931 में कराया गया था। तब से प्रति वर्ष कृष्ण जनमाष्टमी (Krishna Janmashtami 2024) पर यहां विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। शहर सहित आस-पास क्षेत्र के भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी पर सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं का दर्शन करने का सिलसिला चलता रहता है।

सरगुजा महाराजा रामानुज शरण सिंहदेव ने अपनी माता के लिए पैलेस प्रांगण में राधा वल्लभ मंदिर का निर्माण वर्ष 1931 में कराया था। इस मंदिर में रामानुज शरण सिंहदेव की माता पूजा करतीं थीं। तब से कृष्ण जन्माष्टमी पर इस मंदिर में विशेष पूजा की जाती है। इस वर्ष भी कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2024) इस मंदिर में धूमधाम से मनाया जाएगा।

मंदिर में तैयारी पूरी कर ली गई है। मंदिर परिसर की साफ-सफाई कर आकर्षक लाइटिंग से सजाया गया है। वहीं जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2024) से एक दिन पूर्व राजपरिवार की बहू त्रिशाला सिंहदेव ने रविवार को मंदिर पहुंचकर तैयारी का जायजा लिया। यहां सोमवार की सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर में पहुंचेंगे। यह सिलसिला पूरे दिन चलता रहेगा।

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राजपुरोहित कराते हैं जन्म

प्राचीन राधा वल्लभ मंदिर में जन्माष्टमी पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। शहर सहित आस पास के काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और परिवार की सुख समृद्धि व संतान प्राप्ति की मन्नत मांगते हैं। वहीं राजपुरोहित द्वारा जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2024) के दिन रात करीब 12 बजे विशेष पूजा अर्चना कर भगवान कृष्ण का जन्म कराने का विधि पूर्ण करते हैं।

यह है मुहूर्त

मंदिर के पुजारी पंडित रामनरेश द्विवेदी ने बताया कि 26 अगस्त की सुबह 8.20 बजे से अष्ठमी तिथि लग जाएगी, जो 27 अगस्त की सुबह 6.34 बजे तक रहेगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र 26 अगस्त की रात 9.10 बजे से 27 अगस्त की सुबह 8.23 बजे तक रहेगा। जबकि जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाया जाएगा।

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जन्म से पूर्व भजन कीर्तन

मंदिर के पुजारी पंडित रामनरेश द्विवेदी ने बताया जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2024) के दिन शाम 4-6 बजे तक महिला मंडली द्वारा भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। वहीं भगवान कृष्ण की जन्म कराने की विधि रात 8.30 से 10.30 बजे तक होगी।