
अब भास्करपारा में कोयला खदान खोलने का तेज हुआ विरोध, ग्रामीणों ने राज्यपाल से लगाई गुहार
अंबिकापुर। सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत भास्करपारा में प्रकाश इंडस्ट्रीज द्वारा कोयला खदान खोले जाने का विरोध जारी है। इसी कड़ी में प्रभावित ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने सुनील साहू के नेतृत्व में राज्यपाल के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर खदान नहीं खोले जाने की मांग की है। गौरतलब है कि भास्करपारा कोल ब्लॉक को प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा खदान खोले जाने जमीन चिन्हांकन सहित पेड़ पौधों की गिनती करने की प्रक्रिया चालू है। इसका विरोध ग्रामीण आए दिन करते हैं। बुधवार को क्षेत्र के जनपद सदस्य सुनील साहू के नेतृत्व में प्रभावित ग्राम के बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भैयाथान पहुंचकर राज्यपाल के नाम एसडीएम सागर सिंह को 7 बिंदुओं का उल्लेख करते हुए खदान नहीं खोले जाने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में बताया गया है कि प्रकाश इंडस्ट्रीज को लीज में प्राप्त कुल 932 हेक्टेयर भूमि में आधी से अधिक वन भूमि है, जिस पर पेड़ पौधे लगे हुए हैं जिसमें वन्यजीव सहित आसपास के ग्रामीण वनोपज प्राप्त कर अपना जीविकोपार्जन करते हैं। साथ ही पर्यावरण के दृष्टिकोण से हजारों पेड़ पौधों का कटना मानवीय जीवन के लिए घातक होगा।
वहीं स्टेट हाइवे 12 पटना-भैयाथान मार्ग अधिग्रहित क्षेत्र से गुजरती है, स्टेट हाइवे के किनारे से खाड़ा पारा से बसकर बड़सरा सहित दर्जनों ग्राम पंचायतों में जल जीवन मिशन योजना अंतर्गत पाइपलाइन द्वारा घर घर जल पहुंचना प्रस्तावित था जिसे कंपनी ने पत्र लिखकर रोक दिया है। इससे ग्रामीणों को स्टेट हाइवे से दूर होने का खतरा भी मंडरा रहा है। साथ ही कंपनी द्वारा अधिग्रहित क्षेत्र में वन भूमि अधिकार पत्र सहित सिंहदेव योजना अंतर्गत पट्टा दिया गया है लेकिन आज पर्यंत तक राजस्व अभिलेख में दर्ज नहीं हुआ है।
तीन-चार पीढिय़ों से शासकीय भूमि पर घर बनाकर सैकड़ों परिवार अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं लेकिन ऐसी भूमि पर दूसरे लोगों का अवैध पट्टा बना हुआ है जिसे जांचकर काबिज व वास्तविक परिवारों के नाम भू अभिलेख में दर्ज किए जाने की मांग भी की है। भास्करपारा कोल ब्लॉक के अधिग्रहित क्षेत्र में कई पारा मोहल्ले आते हैं जिन्हें विस्थापित होने का डर सता रहा है। वे अपने भविष्य को लेकर आशंकित व चिंतित हैं। वहीं 26 वर्ष पूर्व एसईसीएल द्वारा भास्कर पारा में खदान खोला गया था जिसमें ग्रामीणों को आज तक मुआवजा व नौकरी अप्राप्त है। इसका भी उल्लेख किया गया है।
इस दौरान सरपंच ललिता सिंह, सोनमती सिंह, ललिता सिंह, सोनू जायसवाल, रामू गोस्वामी, विनय जायसवाल, नरेंद्र साहू, हीरा लाल राजवाड़े, छोटेलाल, अवध कुर्रे भगवानदास, सोहर सिंह, बिशुनराम, रामनारायण यादव, मनीष यादव, राज कुमार साहू सहित बड़ी संख्या में प्रभावित क्षेत्र के महिलाएं पुरुष शामिल रहे। वहीं सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से मौके पर प्रशिक्षु डीएसपी दीप माला, थाना प्रभारी सीपी तिवारी, तहसीलदार ओपी सिंह सहित काफी संख्या में पुलिस व राजस्व के कर्मचारी मौजूद रहे।
पूर्व में खुली खदान से नहीं मिली मुआवजा व नौकरी
भास्करपारा कोल ब्लॉक से एसईसीएल द्वारा वर्ष 1996 में कोयला निकालने हेतु दो मुहाड़े बनाए गए थे। इसमें दर्जनों आदिवासी परिवारोंकी सैकड़ों एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी लेकिन किसी भी परिवार को नौकरी व मुआवजा एसईसीएल द्वारा नहीं दिया गया। वर्तमान में खदान बंद है और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। एसईसीएल द्वारा अधिग्रहित क्षेत्र को वर्तमान में प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा पृथक कर दिया गया है।
Published on:
08 Jun 2022 09:04 pm
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