2 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आंखों में रोशनी नहीं, लेकिन सॉफ्टवेयर से पढ़ाई कर पिता का नाम किया रौशन

पुत्र-पुत्री की आंखें न हो तो एक माता-पिता पर क्या गुजरती होगी, वह वे ही जान सकते हैं, लेकिन किसान पिता ने दोनों बच्चों का हौसला कम नहीं होने दिया। दोनों को पढ़ा-लिखाकर इस काबिल बना दिया कि आज वे अपने किसी काम के लिए दूसरों पर मोहताज नहीं है।

2 min read
Google source verification
आंखों में रोशनी नहीं, लेकिन सॉफ्टवेयर से पढ़ाई कर पिता का नाम किया रौशन

आंखों में रोशनी नहीं, लेकिन सॉफ्टवेयर से पढ़ाई कर पिता का नाम किया रौशन

अंबिकापुर. आंखें नहीं हैं तो क्या हुआ, हौसला तो है। खुद की जिंदगी में भले ही अंधियारा हो लेकिन जो दूसरों की जिंदगी रौशन कर दे, वही सच्चे मायनों में पथ प्रदर्शक है। ऐसे ही पद प्रदर्शक बने हैं सरगुजा जिले के लुंड्रा ब्लॉक के किसान के पुत्र विनय और पुत्री श्वेता। भाई-बहन जन्म से ही दोनों आंखों से देख नहीं सकते। पुत्र-पुत्री की आंखें न हो तो एक माता-पिता पर क्या गुजरती होगी, वह वे ही जान सकते हैं, लेकिन किसान पिता ने दोनों बच्चों का हौसला कम नहीं होने दिया। दोनों को पढ़ा-लिखाकर इस काबिल बना दिया कि आज वे अपने किसी काम के लिए दूसरों पर मोहताज नहीं है।

पुत्र विनय जहां दिल्ली के केनरा बैंक में अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं तो पुत्री श्वेता अंबिकापुर के राजमोहिनी देवी गर्ल्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर है। बगैर आंखों के श्वेता गर्ल्स कॉलेज की छात्राओं की जिन्दगी संवार रही है।

सरगुजा में प्रोफेसर बनना मेरा सौभाग्य
श्वेता बताती है कि उन्हें सहायक प्रोफेसर बनकर नहीं रहना है। इस वजह से उन्होंने जेएनयू से एमफिल की पढ़ाई जारी रखी है। उन्होंने कहा कि सौभाग्य की बात है कि मुझे सहायक प्रोफेसर के रूप में काम करने का मौका मेरे जन्मभूमि क्षेत्र में मिला। मैं पहाड़ी कोरवा क्षेत्र में जाकर कई विषयों पर शोध भी कर रहीं हूं। मुझे यहां के बच्चों को पढ़ाने में आनंद आता है।

माता-पिता का सहारा बने
दोनों भाई-बहन ने नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड हॉस्टल में रहकर स्कूली शिक्षा ली। इसके बाद भी इनके कदम नहीं रुके और पूरी पढ़ाई दिल्ली में ही की। पढ़ाई पूरी करने के बाद विनय ने परीक्षा पास कर दिल्ली में ही केनरा बैंक में आज अधिकारी के पद पर कार्यरत है। वहीं श्वेता अंबिकापुर के राजमोहिनी देवी गर्ल्स कॉलेज में सहायक प्राध्यापक हैं। आज दोनों ही अपने माता-पिता का सहारा बन चुके हैं।

जॉस साफ्टवेयर से कराती है पढ़ाई
श्वेता कंप्यूटर में लगे जॉस सॉफ्टवेयर व किबो प्रिंटर स्केनर से छात्राओं को पढ़ाती है। वहीं श्वेता अपने लैपटॉप, मोबाइल व अन्य सारी जरूरत के काम काफी आसानी से कर लेती है। श्वेता को पढ़ाने व कंप्यूटर व मोबाइल ऑपरेट करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती है। मोबाइल व कंप्यूटर पर उनकी अंगुलियां सरपट चलती हैं।

Story Loader

बड़ी खबरें

View All

अंबिकापुर

छत्तीसगढ़

ट्रेंडिंग