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छत्तीसगढ़ में एक पुलिस चौकी ऐसी भी जहां रात में बंद रहता है ताला, शिकायत करने सुबह का करना पड़ता है इंतजार

Police post: चौकी के रात 11.30 बजे के बाद बंद रहने से उस समय पहुंचे फरियादी (Victims) की नहीं हो पाती सुनवाई, सुबह 6 बजे के बाद चौकी के गेट व दरवाजे का खुलता है ताला, इन 6 घंटे में किसी पर मुसीबत (Trouble) आ जाए तो यहां की पुलिस उनकी सुनने वाली नहीं

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अंबिकापुर. Police post: कोई भी पुलिस थाना हो या चौकी, फरियादियों के लिए हर समय खुले रहते हंै, परंतु शहर में एक पुलिस चौकी ऐसी भी है जहां रात को फरियादी अपनी समस्या लेकर नहीं पहुंच सकते। अगर पहुंच भी जाते हैं तो उस चौकी के अंदर प्रवेश के लिए उन्हें सुबह का इंतजार करना पड़ता है। यह इसलिए कि रात को चौकी में ताला लगा हुआ होता है और अंदर पुलिस (Surguja Police) चैन की बंसी बजाती रहती है या फिर सर्द रात में चैन की नींद सो रही होती है। क्षेत्र में रात के समय क्या हो रहा है या फिर बाहर खड़ा फरियादी किस मुसीबत में है इससे पुलिस को कुछ लेना-देना नहीं होता।


हम बात कर रहे हैं शहर के मणिपुर पुलिस चौकी की। यहां मुख्य द्वार पर ही नहीं बल्कि चौकी के अंदर का दरवाजा भी पूरी तरह से लॉक रहता है। बाहर अगर मुसीबत में फंसा कोई व्यक्ति रात को गुहार भी लगाएगा तो यहां की पुलिस की नींद नहीं खुलती। पुलिसकर्मी यहां नशे में सोते हैं, या ठंड के कारण बाहर निकलना नहीं चाहते, इसका जवाब तो वरिष्ठ अधिकारी ही दे सकते हैं।

शनिवार की सुबह 5 बजे की यह तस्वीर जब एक फरियादी कड़कड़ाती ठंड में कंबल लपेटे चौकी के बाहर खड़ा पुलिस चौकी के खुलने का इंतजार कर रहा था। सुबह 6 बजे तक जब चौकी का दरवाजा नहीं खुला तब फरियादी बिना अपनी शिकायत सुनाएं वहां से लौट गया। यह तो आज की बात थी यहां के हालात रोज ऐसे ही हैं।


सुबह का करना होता है इंतजार
मणिपुर चौकी की स्थापना जिन कारणों से की गई थी वह पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। कारण आज भी किसी से छिपा नहीं है पूरा क्षेत्र कई अपराध का गढ़ लंबे समय से है। अवैध शराब, जुआ, मारपीट व भू बिचौलियों के इस गढ़ में खास तौर पर रात के समय कितने अनैतिक काम होते हैं यह भी किसी से छिपा नहीं है।

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इन सबके बाद भी दिन में अपराधी तत्वों और भू बिचौलियों को अक्सर थाने के अंदर बकायदा कुर्सी प्रदान की जाती है। दूसरी भाषा में कह सकते हैं कि उनके लिए इस चौकी में हर समय रेड कार्पेट बिछाना हो तो वह भी बिछ सकता है, परंतु रात के समय गरीब दुखी फरियादियों की फरियाद यहां सुनने वाला कोई नहीं।

मणिपुर चौकी की बात करें तो यहां हर रात यही आलम देखने को मिलता है। तड़के अगर कोई मारपीट या बड़ी घटना-दुर्घटना हो जाए तो पीडि़त को अपनी बात रखने के लिए सुबह 6 बजे का इंतजार करना पड़ता है।

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सुरक्षा के नाते गेट को बंद करना जरूरी
चौकी के देर रात बंद होने के संबंध में जब प्रभारी अनिता आयाम से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि रात के 11.30 बजे के बाद जब लोगों की आवाजाही बंद हो जाती है, तब चौकी को बंद कर दिया जाता है। सारी गाडिय़ां परिसर में खड़ी रहतीं हैं, इसलिए सुरक्षा के नाते गेट को बंद करना जरूरी है।

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