प्रतिभाओं का सम्मान : अपने काम से दुनिया पर असर डालने वाले कई लोग शामिल
वॉशिंगटन. टाइम मैगजीन की ओर से जारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने वाले दुनिया के 100 लोगों की सूची में कई भारतीयों ने जलवा बिखेरा है। सूची में एआइ के क्षेत्र में दुनिया के सर्वाधिक प्रभावशाली लोगों को शामिल किया गया है। ये अपने काम से दुनिया पर असर डाल रहे हैं। सूची में शामिल भारतीय अपने काम में दुनिया में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं।
मनु चोपड़ा
मनु चोपड़ा (27) नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन कार्या के फाउंडर हैं। यह संस्था वर्कर्स को एआइ प्रोजेक्ट पर काम के लिए अच्छी सैलरी देती है। कार्या अपने कर्मचारियों को कम से कम 5 डॉलर प्रति घंटे का भुगतान करती है। यह संस्था उन भारतीय भाषाओं के डाटासेट भी कलेक्ट करती है, जिन्हें अब तक एआइ बूम से अलग रखा गया है।
नील खोसला
नील खोसला टेलीहेल्थ स्टार्टअप कुराई के सीईओ और को-फाउंडर हैं। खोसला ने 2017 में यह कंपनी खोली थी। कंपनी का लक्ष्य देश के मेडिकल केयर क्षेत्र में क्रांति लाना है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए 15 डॉलर की मासिक फीस पर यूजर्स मेंबरशिप लेकर वर्चुअल मेडिकल केयर सर्विस का फायदा उठा सकते हैं।
स्नेहा रेवनूर
स्नेहा रेवनूर (18) एनकोड जस्टिस की फाउंडर और चेयरमैन हैं। उन्होंने 2020 में कैलिफोर्निया में सिविल सोसाइटी ग्रुप एनकोड जस्टिस की शुरुआत की थी। इस प्लेटफॉर्म ने एआइ पॉलिसी पर दुनियाभर के युवाओं को शिक्षित करने का काम किया। इन्हें एआइ की दुनिया का ग्रेटा थनबर्ग भी कहा जाता है।
कालिका बाली
कालिका बाली माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च इंडिया में रिसर्चर हैं। उन्होंने टेक्नोलॉजी में लैंग्वेज बैरियर को खत्म करने की दिशा में काम किया। बाली बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ एक अरब से भी ज्यादा लोगों की ओर से बोली जाने वाली पांच भारतीय भाषाओं में जेंडर इंटेंशनल डाटाबेस बनाने पर काम कर रही हैं।
तुषिता गुप्ता
तुषिता गुप्ता रिफाइबर्ड की सीटीओ और को-फाउंडर हैं। तुषिता और सारिका बजाज की कंपनी कपड़ा रिसाइक्लिंग में क्रांति लाने के लिए काम कर रही है। रिफाइबर्ड का एआइ सिस्टम कपड़ों का एनालिसिस, फैब्रिक की पहचान और सिंथेटिक सामग्री को रिसाइकिल करने में मदद करता है।
रोमेश और सुनील वाधवानी
रोमेश और सुनील वाधवानी मुंबई के नॉन प्रॉफिटेबल ऑर्गनाइजेशन वाधवानी एआइ के को-फाउंडर हैं। वाधवानी एआइ हेल्थकेयर, एजुकेशन और एग्रीकल्चर सहित कई क्षेत्रों में काम करता है। वाधवानी एआइ ने टीबी रोगियों के हाई रिस्क और डेथ रेट की भविष्यवाणी करने के लिए एआइ प्रोग्राम की सीरीज डवलेप की है।
पुष्मीत कोहली
पुष्मीत कोहली गूगल डीपमाइंड में साइंस प्रोजेक्ट के लिए रेस्पॉन्सिबल और रिलायबल एआइ टीम को लीड कर रहे हैं। उन्हें एआइ सिक्योरिटी और अल्फाफोल्ड प्रोटीन स्ट्रक्चर प्रेडिक्शन सिस्टम पर काम के लिए जाना जाता है। कोहली का मानना है कि एआइ से दुनिाय की गंभीर समस्याओं को हल किया जा सकता है।
अरविंद नारायणन और सयाश कपूर
अरविंद नारायणन प्रिंसटन विश्वविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर हैं। उन्हें डिजिटल टेक्नोलॉजी और एआइ के सामाजिक प्रभाव पर काम के लिए जाना जाता है। उन्होंने 2019 में एआइ स्नेक ऑयल को कैसे पहचानें नाम का भाषण दिया। भाषण वायरल होने के बाद उन्हें इस विषय पर पीएचडी छात्रों और सयाश कपूर के साथ किताब लिखनी पड़ी।