पृथ्वी को खोदने के बजाए जापान की टोहोकु यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने लैब में एक छोटी धरती बनाई। उन्होंने इसे हूबहू धरती की तरह बनाया। इसमें बाहरी सतह, भीतरी मिट्टी, क्रस्ट, मैंटल कोर और कोर भी बनाई गई। कोर या गर्भ बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने लोहे, निकेल और सिलिकन का इस्तेमाल किया। फिर इस मिश्रण को 6,000 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर भारी दबाव में रखा गया। नतीजे हूबहू धरती जैसे ही समामने आए। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के गर्भ में होने वाली हलचल (सिस्मिक मूवमेंट) के आंकड़ों को एक्सपेरिमेंट के डाटा से मिलाया। इसके बाद ही इसके सिलिकन होने का दावा किया गया। हालांकि, कुछ वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पृथ्वी के कोर में लोहे, निकेल और सिलिकन के साथ ऑक्सीजन भी हो सकती है। धरती की असीम गहराई को समझने से पृथ्वी की सेहत और ब्रह्मांड के बारे में काफी कुछ पता चल सकेगा।