
नासा ने आर्टेमिस II मिशन लॉन्च किया (फोटो- Insider Wire एक्स पोस्ट)
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने लंबे अंतराल के बाद मानव मिशन को चंद्रमा की दिशा में भेजकर इतिहास रच दिया है है। यह मिशन 2 अप्रैल को सुबह 4:05 बजे लॉन्च हुआ। इसे भविष्य के चंद्र अभियान और चांद पर मनुष्य के बसने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर रवाना हो गया है। इस मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री फिलहाल पृथ्वी की ऊपरी कक्षा में परीक्षण पूरा कर रहे हैं और अगले चरण में चंद्रमा की ओर बढ़ेंगे। यह मिशन न केवल तकनीकी परीक्षण है बल्कि भविष्य के लूनर लैंडिंग मिशनों की तैयारी भी है।
54 सालों बाद यह पहली बार है जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार कर चांद के पास पहुंचेगा। इससे पहले 1972 में अपोलो17 मिशन के तहत ऐसा हुआ था। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री गए है जो चांद के चक्कर लगाकर धरती पर वापस आएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में 10 दिन का समय लगेगा। बता दें कि लॉन्चिंग से एक घंटे पहले लॉन्च अबॉर्ट सिस्टम (यह इमरजेंसी एग्जिट है जो खराबी आने पर एस्ट्रोनॉट्स वाले हिस्से को अलग कर देता है) में कुछ गड़बड़ी आ गई थी जिसके चलते लॉन्च पर खतरा मंडराने लगा था। लेकिन समय रहते इस समस्या को ठीक किया गया और सफल लॉन्चिंग की गई।
राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष प्रशासन (NASA) का आर्टेमिस II मिशन सफल लॉन्च के बाद हाई अर्थ ऑर्बिट में पहुंच चुका है। इस चरण में अंतरिक्ष यात्री ओरियन स्पेसक्राफ्ट के सभी महत्वपूर्ण सिस्टम की जांच कर रहे हैं। पहले 24 घंटे में लाइफ सपोर्ट सिस्टम, थ्रस्टर और नेविगेशन सिस्टम का परीक्षण किया गया। साथ ही क्रू ने मैनुअल पायलटिंग का अभ्यास भी किया ताकि किसी आपात स्थिति में नियंत्रण बनाए रखा जा सके। यह चरण बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह सुनिश्चित होता है कि अंतरिक्ष यान लंबी दूरी की यात्रा के लिए पूरी तरह सक्षम है।
सभी सिस्टम सफलतापूर्वक जांचने के बाद ओरियन स्पेसक्राफ्ट ट्रांस लूनर इंजेक्शन प्रक्रिया शुरू करेगा। इस प्रक्रिया में शक्तिशाली इंजन के जरिए अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण सीमा से बाहर धकेला जाएगा। इसके बाद अंतरिक्ष यात्री लगभग 4 दिनों की यात्रा में चंद्रमा के करीब पहुंचेंगे। इस दौरान वे लगातार सिस्टम मॉनिटरिंग और वैज्ञानिक ऑब्जर्वेशन करेंगे। यह यात्रा न केवल तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अनुभव साबित होगी।
चंद्रमा के पास पहुंचने के बाद ओरियन स्पेसक्राफ्ट लगभग 7400 किलोमीटर की दूरी से फ्लाईबाय करेगा। इस दौरान फ्री रिटर्न ट्राजेक्टरी का उपयोग किया जाएगा, जिससे यान बिना अतिरिक्त ईंधन खर्च किए पृथ्वी की ओर लौट सकेगा। यह मिशन पिछले 54 वर्षों में पहला अवसर है जब इंसान डीप स्पेस में इतनी दूर तक गया है। इससे मिलने वाला डेटा भविष्य के आर्टेमिस III मिशन के लिए बेहद अहम होगा, जिसका लक्ष्य चंद्रमा पर मानव को उतारना है।
Updated on:
02 Apr 2026 11:59 am
Published on:
02 Apr 2026 11:57 am
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