
चीन-ताइवानी टेंशन (AI जनरेटेड इमेज
Taiwan Security Concerns: अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन से जाने के बाद के ड्रैगन के तेवर एक बार फिर आक्रामक नजर आने लगे हैं। अब ताइवान से जुड़े धार्मिक अनुयायियों की गिरफ्तारी ने एशिया की राजनीति में नई चिंता पैदा कर दी है। ताइवान की सेमी-ऑफिशियल क्रॉस-स्ट्रेट एजेंसी के मुताबिक, चीन ने धार्मिक आंदोलन ‘आई-कुआन ताओ’ से जुड़े तीन ताइवानी नागरिकों को फुजियान और ग्वांगडोंग प्रांत में हिरासत में लिया है।
कई विशेषज्ञ इसे सिर्फ धार्मिक मामला नहीं, बल्कि ताइवान पर दबाव बनाने की चीन की बड़ी रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। अब चीन पर आरोप लग रहे हैं कि वह ताइवानी नागरिकों और धार्मिक समूहों को निशाना बनाकर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
‘द ताइपे टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, SEF के महासचिव लुओ वेन-जिया ने बताया कि कुछ ताइवानी नागरिकों को पहले चीन छोड़ने से रोक दिया गया और बाद में उन्हें अस्पष्ट परिस्थितियों में हिरासत में ले लिया गया। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि इन लोगों को कितने समय तक रखा गया या वे आधिकारिक तौर पर चीनी हिरासत में थे या नहीं।
SEF के अनुसार, साल 2019 से अब तक 17 अलग-अलग मामलों में कम से कम 19 ताइवानी नागरिकों को चीन में धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मामलों में हिरासत में लिया गया है। इनमें से 14 लोग ‘आई-कुआन ताओ’ धार्मिक समूह से जुड़े थे, जबकि बाकी ईसाई संगठनों और यूनिफिकेशन चर्च से जुड़े थे।
ताइवान की सरकार और सामाजिक संगठनों ने सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए आई-कुआन ताओ के अनुयायियों को चीन यात्रा से बचने की सलाह दी है। वहीं, मार्च में चीन द्वारा लागू किए गए नए ‘जातीय एकता और प्रगति’ कानून को लेकर भी चिंता जताई गई है। लुओ का कहना है कि इस कानून के बाद ताइवानी नागरिकों के लिए चीन जाना और ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है।
ताइवान की संस्था ‘SEF’ ने चीन की आलोचना करते हुए कहा कि हाल में जिन ताइवानी नागरिकों को हिरासत में लिया गया, उसकी जानकारी चीन ने ताइवान को नहीं दी।
बता दें SEF यानी ‘स्ट्रेट्स एक्सचेंज फाउंडेशन’, ताइवान और चीन के बीच लोगों से जुड़े मामलों और ताइवानियों की मदद करने वाली प्रमुख संस्था है। वहीं चीन की तरफ से यह काम ‘एसोसिएशन फॉर रिलेशंस अक्रॉस द ताइवान’ स्ट्रेट्स देखता है। दोनों पक्षों के बीच औपचारिक बातचीत पिछले करीब 10 साल से बंद है।
चीन लगातार दावा करता है कि ताइवान उसका ही हिस्सा है और उसे अलग देश नहीं माना जा सकता। बीजिंग इस मुद्दे को अपनी राष्ट्रीय नीति का हिस्सा मानता है और घरेलू कानूनों व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इसी बात को दोहराता रहता है।
Published on:
24 May 2026 09:16 pm
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