
वाशिंगटन: अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तीन नवंबर से 14 नवंबर के बीच जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, वियतनाम और फिलीपींस का दौरा करेंगे। व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने इससे पहले ट्रंप के चीन, दक्षिण कोरिया, और जापान जाने की योजना की पुष्टि की थी। व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को कहा कि ट्रंप एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपीइसी) सम्मेलन में भाग लेने के लिए वियतनाम और दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के सम्मेलन में भाग लेने के लिए फिलीपींस भी जाएंगे।
व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर कहा कि ट्रंप के एशिया दौरे का एक प्रमुख उद्देश्य उत्तर कोरिया से बढ़ते खतरे से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को मजबूत करना और कोरियाई महाद्वीप को पूर्ण रूप से परमाणु मुक्त बनाना है। ट्रंप ने उत्तर कोरिया की ओर से बढ़ते परमाणु खतरे के बीच मंगलवार को कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो अमरीका उत्तर कोरिया के खिलाफ 'विध्वंसक' सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है।
व्हाइट हाउस के अनुसार कि ट्रंप का एशिया दौरा इस क्षेत्र में अमरीका की गठबंधन और दोस्ती की प्रतिबद्धता और अमरीका के व्यापरिक साझेदारों के बीच निष्पक्ष और पारस्परिक आर्थिक संबंध की महत्ता दर्शाता है। ट्रंप के चीन के दौरे की तैयारियों के मद्देनजर अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन रविवार तक चीन में रहेंगे।
रूसी दखल मामले में व्हाइट हाउस कर्मियों से पूछताछ शुरू
विशेष वकील रॉबर्ट म्यूलर ने राष्ट्रपति चुनाव 2016 में रूसी दखल के मामले की जांच के लिए व्हाइट हाउस के कर्मचारियों से पूछताछ शुरू कर दी है। जानकार सूत्रों ने फॉक्स न्यूज को शुक्रवार को बताया कि सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल व राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख कीथ केलौग से गुरुवार को पूछताछ की गई।
पूर्व राष्ट्रीय सलाहकार माइकल फ्लिन से भी पूछताछ की गई, जिन्होंने फरवरी में इस्तीफा दे दिया था। म्यूलर की टीम द्वारा व्हाइट हाउस के कर्मचारियों से पूछताछ करने की उम्मीद की जा रही थी और रूसी दखल के संबंध में पहले ही बड़ी मात्रा में सबूत तलाश लिए गए हैं।
इस मामले में एक और प्रगति हुई है। स्थानीय समाचार एजेंसी को पता चला है कि कांग्रेस संबंधी जांचकर्ताओं के साथ ही संघीय एजेंट भी ट्रंप के चुनाव प्रचार के दौरान मार्च, 2016 में वाशिंगटन डी.सी. के पुराने पोस्ट ऑफिस में राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक की भी जांच कर रहे हैं। बैठक के दौरान कथित तौर पर एक कर्मचारी जॉर्ज पैपाडोपौलॉस ने अमरीका और रूस के रिश्तों में सुधार लाने के लिए वरिष्ठ रूसी अधिकारियों के साथ बैठक करने का सुझाव दिया था।
सूत्रों ने समाचार एजेंसी को बताया कि तत्कालीन सीनेटर जेफ सेशंस ने अन्य लोगों के साथ इस चर्चा पर ईमेल के जरिए हुई बातचीत के आधार पर रोक लगा दी थी कि यह बैठक लोगन अधिनियम का उल्लंघन हो सकता है। 200 साल पुराना यह अधिनियम अमरीकी नागरिकों को मौजूदा सरकार की मंजूरी के बिना विदेशी सरकार के साथ मेल-जोल से रोकता है।
Published on:
01 Oct 2017 05:51 am

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