ईरान को भुगतने होंगे और भी प्रतिबंध, परमाणु हथियारों पर जारी रहेगा दबाव: अमरीका

ईरान को भुगतने होंगे और भी प्रतिबंध, परमाणु हथियारों पर जारी रहेगा दबाव: अमरीका

Shweta Singh | Publish: Jul, 09 2019 12:03:58 PM (IST) | Updated: Jul, 09 2019 12:45:35 PM (IST) अमरीका

  • US Iran तनाव के बीच अमरीकी विदेश सचिव ने दिया बड़ा बयान
  • परमाणु हथियार के निर्माण को बंद करने तक जारी रहेगा ईरान पर दबाव: पोम्पियो

वाशिंगटन। अमरीकी विदेश सचिव माइक पोम्पियो ( us foreign secretary Mike Pompeo ) ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। पोम्पियो ने कहा कि अभी तक ट्रंप प्रशासन ( Donald Trump ) ने ईरान से उम्मीद नहीं छोड़ी है। हम तेहरान पर इसी तरह तब तक दबाव बनाएंगे जब तक वो अपने परमाणु हथियार बनाने के मंसूबों को छोड़ नहीं देता।

ईरान को लेकर सख्त रहेगा अमरीका का रूख

सोमवार को माइक पोम्पियो 'क्रिश्चियन यूनाईटेड फॉर इजराइल' नाम के एक समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने ईरान को लेकर अमरीका के रूख के बारे में बात की। पोम्पियो ने कहा, 'हमने ईरान पर इतिहास में अब तक का सबसे अधिक दबाव बनाया है और हम अभी तक इससे संतुष्ट नहीं हैं। हमने ईरान को दी जा रही अरबों की फंडिंग को रोक दिया, ईरान जिसका संभावित इस्तेमाल अपने खतरनाक इरादों को पूरा करने में लगा सकता था।'

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अमरीकी धैर्य और संकल्प की परीक्षा न लें ईरान

इसके साथ पोम्पियो ने अमरीका ने अपने हितों की सुरक्षा का हवाला देते हुए ईरान पर और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा,'मैं स्पष्ट तौर पर कहना चाहता हूं कि ईरान को अमरीकी धैर्य और संकल्प की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। हम बेहतर की उम्मीद करते हैं, लेकिन अमरीका और उसकी सेना खाड़ी क्षेत्र में अपने हितों और नागरिकों की रक्षा करने के लिए हमेशा तैयार है।' आपको बता दें कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते के तहत यूरेनियम संवर्द्धन ( Uranium Enrichment ) की तय सीमा को पार कर लिया है। ईरान ने 3.67 प्रतिशत की तय सीमा को पार कर अपना यूरेनियम संवर्द्धन 4.5 प्रतिशत तक कर लिया है। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रवक्ता बहरूज कमालवंडी ने यह घोषणा की।

2015 में ईरान ने किया था समझौता

गौरतलब है कि साल 2015 में ईरान ने अमरीका, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत ईरान ने उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जतायी थी।

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