जयपुर

Ramgarh Dam: सपनों की बूंदों से सजा उम्मीदों का समंदर, नई पीढ़ी ने चलाया फावड़ा

रामगढ़ बांध पर श्रमदान में फावड़ों की खनक और बच्चों की किलकारियों ने एक संदेश दिया ‘हम इतिहास नहीं, भविष्य को सींचने आए हैं।’

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Jul 04, 2025
रामगढ़ डेम पर श्रमदान अभियान, पत्रिका फोटो

Rajasthan: एक समय था जब रामगढ़ बांध की लहरों में सूरज झलकता था, घाटियों में खजूर के पेड़ झूमते थे और बाणगंगा की कलकल में गांवों की रौनक बहती थी। आज वही घाटी विलायती बबूल के जंगल में बदल चुकी है। गुरुवार की फावड़ों की खनक और बच्चों की किलकारियों ने एक संदेश दिया ‘हम इतिहास नहीं, भविष्य को सींचने आए हैं।’

अगर रामगढ़ बांध में पानी लौट आए, तो जयपुर की लाइफलाइन फिर जिंदा हो सकती है। यही सपना लेकर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मालावाला के शिक्षकों, विद्यार्थियों, एनसीसी एयर विंग और स्काउट कैडेट्स ने राजस्थान पत्रिका के ‘अमृतं जलम्’ अभियान के तहत रामगढ़ बांध में श्रमदान किया।

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प्रधानाचार्य बीरेंद्र कुमार मीना ने कहा कि रामगढ़ बांध सिर्फ एक जल स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत है। इसे बचाना हम सबका नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि यह बांध ऐतिहासिक बाणगंगा नदी पर बना है और कभी जयपुर की जल जीवनरेखा हुआ करता था।

विलायती बबूल हटते ही दिखा मूल स्वरूप

रामगढ़ बांध में फैले विलायती बबूल को जेसीबी की सहायता से हटाया जा रहा है। इसके चलते अब धीरे-धीरे बांध का मूल स्वरूप भी दिखाई देने लगा है। विलायती बबूल न केवल बांध की सुंदरता को खराब कर रहा था, बल्कि जल संरक्षण में भी बाधा बन रहा था। यह पेड़ पानी सोखने और अन्य वनस्पतियों के विकास में अवरोधक माना जाता है।

जल ही जीवन: यादों से लेकर भविष्य तक

रामगढ़ बांध कभी परिवार-मेहमानों के लिए घूमने का पसंदीदा स्थान हुआ करता था। बांध में पानी लौटेगा तो न सिर्फ गांवों की प्यास बुझेगी, बल्कि रोजगार-पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
सुभाष तिवाड़ी, शिक्षक, जमवारामगढ़ निवासी

क्षेत्र में विलायती बबूल ने छीनी हरियाली

बांध की डाउनस्ट्रीम में बसे गांव जारूंडा निवासी शिक्षिका अंजली शर्मा ने भावुक होकर बताया, जब मैं छोटी थी, तब रामगढ़ बांध लबालब भरा रहता था। आसपास के खेतों में गन्ने की खेती होती थी। पूरा इलाका हरा-भरा था, अब बांध सूख गया है, घाटी वीरान हो चुकी है और विलायती बबूल का जंगल उग आया है।

इन्होंने निभाई भागीदारी

शिक्षक विवेक चौधरी, मुकेश मीणा, उमेश मीणा, मंजू मीणा, पूनम अग्रवाल, तृप्ता शुक्ला, प्रतिभा खोलिया, अंजना शर्मा, गजेन्द्र शर्मा सहित पूरे स्टाफ और विद्यार्थियों ने भाग लिया। एनसीसी कैडेट्स अंजली गुर्जर, निवेदिता प्रजापत, पायल व स्काउट टीम के माया गुर्जर, शिव गुर्जर, अंकित शर्मा और निशा शर्मा ने श्रमदान में भागीदारी निभाई।

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Updated on:
04 Jul 2025 09:08 am
Published on:
04 Jul 2025 09:07 am
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