
रेडी - टू - मूव होम खरीदने से मालिकाना हक मिलने के लिए ज्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ता है , पर ध्यान रखें कि होम लोन आपकी आर्थिक स्थिति, प्रॉपर्टी की जाँच और लोन चुकाने की क्षमता पर निर्भर करता है। इसलिए आवेदन करने से पहले नीचे दिए गए बातों की तुलना ज़रूर कर लें।
अपने घर में जल्द-से-जल्द रहने की चाहत के कारण, आज ज़्यादातर लोग फिलहाल बन रहे घरों के बजाय रेडी-टू-मूव, यानी बने-बनाए घरों को चुन रहे हैं। फिर भी, अगर कोई बिल्डर किसी फ्लैट को 'रेडी-टू-मूव' बताता है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको तुरंत उसका मालिकाना हक मिल जाएगा। हो सकता है कि घर बनाने का काम पूरा हो गया हो, लेकिन बैंक से लोन मिलने और मालिकाना हक मिलने के लिए जरूरी कानूनी कागजी कार्रवाई अभी भी चल रही हो।
यह फ़र्क इसलिए मायने रखता है क्योंकि लोन का पैसा तब तक नहीं मिलता जब तक प्रॉपर्टी के सभी ज़रूरी कानूनी दस्तावेज़ पूरे न हों, भले ही बाहर से इमारत बनकर पूरी तरह तैयार हो। RBI के लोन देने के नियमों के मुताबिक, लोन देने वाले संस्थाओं को पैसा जारी करने से पहले प्रॉपर्टी की ज़रूरी कानूनी दस्तावेज़ों के साथ-साथ कंस्ट्रक्शन से जुड़ी स्थिति की जाँच करनी होती है।
एक खरीदार के तौर पर समझदारी इसी में है कि आप पैसे देने से पहले इन सारी बातों की अच्छी तरह जाँच कर लें। घर को रहने के लिए तैयार देखकर यह न सोचें कि कागजी कार्रवाई खत्म हो गई है, बल्कि इसे अपनी जाँच की शुरुआत मानें।
बने-बनाए घर खरीदने के मामले में, एग्रीमेंट पर साइन करने के बाद बहुत ही कम समय में, यानी अक्सर सालों के बजाय कुछ हफ़्तों में ही आपको घर का मालिकाना हक मिल जाता है। इसका मतलब है कि होम लोन की मंजूरी, प्रॉपर्टी की जाँच और फंड मिलने की प्रक्रिया जैसे सारे काम लगभग एक साथ पूरे होने चाहिए।
बन रहे घर को खरीदने की प्रक्रिया बिल्डर के कंस्ट्रक्शन शेड्यूल के हिसाब से अलग-अलग चरणों में बंटी होती है, जिससे आपको हर चरण के बीच काफी वक्त मिल जाता है। इसके बजाय, बने-बनाए घर के मामले में आपको बेचने वाले के पेमेंट शेड्यूल के हिसाब से अपने लोन की योजना बनानी पड़ती है।
सबसे पहले देखें कि प्रॉपर्टी की कीमत कितनी है, और उसमें से अपनी सेविंग्स से चुकाए जाने वाले पैसे को घटा दें। इसके बाद जो रकम बचेगी, वही आपके लोन की रकम होगी जिसके लिए आपको लोन देने वाले संस्थान के पास आवेदन करना है।
RBI के दिशानिर्देशों के मुताबिक, लोन देने वाला कोई भी संस्थान किसी प्रॉपर्टी की कीमत का 100% फाइनैंस नहीं कर सकता है, इसलिए आम तौर पर ग्राहक को कम-से-कम 20% रकम का इंतजाम खुद करना पड़ता है। इसके अलावा स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क और ट्रांसफर फीस को भी ध्यान में रखें, क्योंकि आम तौर पर लोन देने वाले संस्थान इन खर्चों के लिए अलग से लोन नहीं देते हैं। याद रखें, यह जरूरी नहीं है कि लोन देने वाले संस्थान की ओर से लोन के तौर पर मिलने वाली अधिकतम रकम आपके लिए बिल्कुल सही हो।
आपको अधिकतम कितना लोन मिल सकता है और आप कितनी EMI आसानी से चुका सकते हैं, इन दोनों में काफी फर्क है। आपकी होम लोन एलिजिबिलिटी आपकी इनकम, उम्र, क्रेडिट प्रोफाइल और दूसरी आर्थिक जिम्मेदारियों पर निर्भर करती है। वहीं, हर महीने EMI चुकाने की आपकी क्षमता का आकलन करते समय दूसरे लोन की EMI और रोज़मर्रा के खर्चों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
लोन की समय-सीमा भी आपके बजट पर असर डालती है। लंबी समय-सीमा चुनने से आपकी मासिक EMI कम हो जाती है, लेकिन आपको कुल मिलाकर ज्यादा ब्याज़ चुकाना पड़ता है। दूसरी ओर, कम समय-सीमा चुनने से EMI बढ़ती है, लेकिन कुल ब्याज़ का खर्च कम हो जाता है।
कोयंबटूर में रहने वाले 32 साल के अमित नौकरी करते हैं और उनकी महीने की इनकम 1.2 लाख रुपये है। वह 65 लाख रुपये की कीमत वाला रेडी-टू-मूव फ्लैट खरीदना चाहते हैं। वह प्रॉपर्टी की कीमत का 20% डाउन पेमेंट करेंगे और बाकी रकम के लिए होम लोन लेंगे।
| खरीदऔरलोनकाविवरण | रकम |
| महीने की इनकम | 1.2 लाख रुपये |
| प्रॉपर्टी की कीमत | 65 लाख रुपये |
| डाउन पेमेंट (20%) | 13 लाख रुपये |
| आवश्यक लोन की रकम | 52 लाख रुपये |
| ब्याज़ दर | 7.50% सालाना |
| समय-सीमा | 20 साल |
| अनुमानित मासिक EMI | 41,891 रुपये/ महीना |
| कुल ब्याज़ | लगभग Rs. 48.54 लाख |
| कुल पुनर्भुगतान | लगभग Rs. 1.01 करोड़ |
इस उदाहरण में अमित की अनुमानित EMI 41,891 रुपये प्रति माह होगी, जो उनकी मासिक इनकम का लगभग 34.9% है। इसका मतलब है कि EMI चुकाने के बाद उनके पास करीब Rs. 78,109 बचेंगे।
हालांकि, केवल इनकम के आधार पर EMI को किफायती नहीं माना जा सकता। अमित को यह भी देखना होगा कि घर के खर्च, दूसरी EMI, बचत और आपातकालीन जरूरतों के लिए रकम अलग रखने के बाद वह हर महीने 41,891 रुपये आसानी से चुका सकते हैं या नहीं।
क्या इस प्रॉपर्टी पर होम लोन फाइनैंसिंग की सुविधा मिल सकती है?
लोन देने वाले संस्थान आपकी प्रॉपर्टी की भी बारीकी से जाँच करते हैं, क्योंकि घर ही लोन के लिए सिक्योरिटी का काम करता है।
कानूनी स्थिति
कंस्ट्रक्शन की स्थिति
लोन देने वाले संस्थान की ओर से तकनीकी जाँच
अपने लोन मिलने का समय सेलर के पेमेंट शेड्यूल के हिसाब से तय करें, और इसका उल्टा न करें। लोन मंजूर होना बस आपकी एलिजिबिलिटी को बताता है, और इसका मतलब सेलर को पैसे मिलना नहीं है। लोन देने वाले संस्थान की ओर से प्रॉपर्टी का वेरिफिकेशन पूरा करने के बाद ही लोन की रकम मिलती है।
रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोगों को अक्सर अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोगों की तुलना में फाइनैंसिंग का इंतज़ाम करने के लिए काफी कम वक्त मिलता है, क्योंकि सेलर जल्दी पैसे मांग सकता है। बजाज फाइनैंस के मुताबिक, कुछ मामलों में आवेदन जमा करने के 48 घंटों के भीतर मंजूरी मिल सकती है, जिससे मंजूरी मिलने के समय को प्रॉपर्टी का मालिकाना हक मिलने के समय के साथ मिलाने में मदद मिल सकती है।
एक बार जब प्रॉपर्टी, ज़रूरी रकम और समय के बारे में सब कुछ तय हो जाए, तो लोन देने वाले अलग-अलग संस्थानों के बीच नीचे दिए गए चार शर्तों की तुलना ज़रूर करें।
| किनचीजोंकीतुलनाकरनीहै | आपकेलिएइसकेक्यामायनेहैं |
| ब्याज़ दर | आपकी EMI के ब्याज़ वाले हिस्से को तय करता है |
| समय-सीमा | आपकी EMI और चुकाया जाने वाला कुल ब्याज़ तय होता है |
| प्रोसेसिंग शुल्क | लोन लेते समय आपके शुरुआती खर्च को बढ़ाता है |
| प्रीपेमेंट की शर्तें | लोन को समय से पहले चुकाने के खर्च को तय करता है |
आपके द्वारा तय की गई रकम, EMI और समय-सीमा के आधार पर, यहाँ बजाज फाइनैंस होम लोन की शर्तें दी गई हैं जिन्हें आप अपनी ज़रूरतों के हिसाब से देख सकते हैं:
| मुख्यबातें | विवरण |
| लोन की रकम | 15 करोड़ रुपये* तक का लोन |
| ब्याज़ दरें | सालाना 7.50%* से शुरू |
| समय-सीमा | 32 साल* तक |
| प्रोसेसिंग शुल्क | लोन की रकम का 4% तक + लागू GST |
| प्रीपेमेंट/फ़ोरक्लोज़र शुल्क | फ्लोटिंग रेट पर लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए कोई शुल्क नहीं |
अगर आपने पहले से ही कहीं और से होम लोन लिया हुआ है, तो आपके लिए बजाज फाइनैंस का बैलेंस ट्रांसफ़र विकल्प 7.60%* सालाना की शुरुआती दर पर उपलब्ध है और इसके साथ आपको 1 करोड़ रुपये* तक का टॉप-अप लोन भी मिल सकता है।
आवेदन करने से पहले आपको किन चीजों की तैयारी कर लेनी चाहिए?
रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी खरीदने से सिर्फ आपके लोन लेने के समय में बदलाव होता है, और समझदारी से लोन लेने के बुनियादी नियम बिल्कुल वैसे ही रहते हैं। सबसे पहले यह तय करें कि आपको असल में कितनी रकम की ज़रूरत है। फिर यह पक्का करें कि प्रॉपर्टी सभी कानूनी और तकनीकी जाँच में खरी उतरे, और आखिर में यह जरूर देख लें कि EMI आपकी इनकम के हिसाब से सही हो।
लोन के मंजूर होने और पैसे मिलने की समय-सीमा को सेलर के शेड्यूल के हिसाब से तय करें। फिर इन ज़रूरतों की तुलना बजाज फाइनैंस होम लोन से करें, जिसमें सालाना 7.50% से शुरू होने वाली ब्याज़ दरें, 32 साल तक की समय-सीमा और आवेदन करने के 48 घंटे* के भीतर मंजूरी मिलने जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। जब ये बातें साफ़ हो जाएँ, तो आप अपनी एलिजिबिलिटी के बारे में जान सकते हैं और होम लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
नियम व शर्तें लागू
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