आगरा

देश में सिर्फ 24 हजार 821 लोग ही बोलते हैं संस्कृत, चौंकाने वाले हैं ये आंकड़े

पर कभी आपने सोचा कि, देश में कितने लोग देवभाषा संस्कृत भाषा को बोलते हैं। तो आप जानकर हैरान रह जाएंगे की सवा अरब की आबादी वाले इस देश में सिर्फ 24 हजार 821 लोग संस्कृत भाषा बोलना जानते हैं।  

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Sep 27, 2022
देश में सिर्फ 24 हजार 821 लोग ही बोलते हैं संस्कृत, चौंकाने वाले हैं ये आंकड़े

हमीरपुर जिला मजिस्ट्रेट ने जब संस्कृत भाषा में फैसला सुनाया तो हर कोई चौंक गया। और संस्कृत का यह फैसला सुर्खियों में आ गया। पर कभी आपने सोचा कि, देश में कितने लोग देवभाषा संस्कृत भाषा को बोलते हैं। तो आप जानकर हैरान रह जाएंगे की सवा अरब की आबादी वाले इस देश में सिर्फ 24 हजार 821 लोग संस्कृत भाषा बोलना जानते हैं। यह जानकारी आपको सोचने पर मजबूर कर देगी। जन सूचना अधिकार यानि की आरटीआई में यह जानकारी गृह मंत्रालय के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय के भाषा विभाग से प्राप्त हुई है। जनगणना 2011 के अनुसार कुल आबादी के अनुपात में महज 0.002 प्रतिशत लोग ही संस्कृत बोल पाते हैं। यह दर शून्य के करीब है।

शर्मनाक है आंकड़ा

यह मान्यता है कि, धर्म और संस्कृति के इस देश में 24 करोड़ देवी देवता को पूजा जाता है। इस भारत में देवभाषा संस्कृत विलुप्त होने के कगार पर है। आगरा के कालीबाड़ी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ देवाशीष भट्टाचार्य ने आरटीआई में संस्कृत भाषा के बारे में भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय के भाषा विभाग से सूचनाएं मांगी थीं। जवाब में महारजिस्ट्रार कार्यालय के रिसर्च ऑफिसर डॉ नक्कीरर ने बताया है कि, आखिरी जनगणना 2011 के अनुसार देश में संस्कृत भाषा बोलने वालों की संख्या 24,821 यानी कुल आबादी के अनुपात में 0.002 फीसदी है।

देश में संस्कृत अनिवार्य भाषा नहीं

संस्कृत देश की अधिसूचित भाषाओं में शामिल है। इसको अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त नहीं है। संस्कृत देश की अधिसूचित भाषाओं में शामिल है। हिंदी को राजभाषा का दर्जा है। देश में संस्कृत अनिवार्य भाषा नहीं है। प्रत्येक के लिए मातृभाषा व क्षेत्र अनुसार अन्य भाषाओं के विकल्प उपलब्ध हैं। सिविल सेवा परीक्षा यूपीएससी में संस्कृत भाषा विषय के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कार्यालय में सूचना नहीं होने की बात कही गई है।

भाषाविद चिंतित

देवभाषा संस्कृत के पुनरुद्धार के लिए विभिन्न योजनाएं व संस्थान चल रहे हैं। देश में धार्मिक, सांस्कृतिक गतिविधियों के वाबजूद देवभाषा के प्रति लोगों के रुझान को भाषाविद चिंताजनक मान रहे हैं।

Published on:
27 Sept 2022 11:10 am
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