दरअसल आचारसंहिता का कड़ाई से पालन हो तो यह परेशानी हो ही नहीं हो लेकिन जब प्रशासन के बस में यह नहीं है तो कम से कम दूसरे उपाय तो किए ही जा सकते है।
आगरा. शहर की सरकार बनने के लिए दावेदार नगर निगम पहुंचना शुरू हो गए हैं और इसके साथ ही पूरा क्षेत्र चक्काजाम जैसी स्थिति में पहुंच गया है। एसएन इमरजेंसी, जिला अस्पताल और अन्य कई निजी चिकित्सालयों में जा रही कई एम्बूलैंस के फंसने की खबरें भी आ रही हैं। इसके अलावा आज जो आमजन इस क्षेत्र में आवश्यक काम के चलते फंस गया, वो व्यवस्था को कोसते हुए तिल—तिल पिसता जा रहा है। दरअसल आचारसंहिता का कड़ाई से पालन हो तो यह परेशानी हो ही नहीं हो लेकिन जब प्रशासन के बस में यह नहीं है तो कम से कम दूसरे उपाय तो किए ही जा सकते है।
तो जरा यह भी उपाय कर डालो
— समाजसेवी व चिकित्सक डा. संजय चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर सीएम यूपी, नगर निगम से विचार साझा करते हुए कहा है कि क्या आॅनलाइन पर्चे नहीं भरे जा सकते। उनके इस विचार को बडी संख्या में सहमति जताते हुए लोगों ने कहा है कि जब बिल से लेकर छोटी सी परीक्षा तक के आवेदन आॅनलाइन हैं तो यह भी आॅनलाइन हो सकता है। इसमें डा. गजेन्द्र तोमर ने यहां तक कह दिया है कि वोटिंग भी आॅललाइन होनी चाहिए। अजय और विजय गुप्ता ने भी सहमति जताई।
— शहर की बाहरी कॉलोनी या किसी क्षेत्र में किसी सरकारी या गैर सरकारी इमारत में आवेदन लेने का काम किया जा सकता है। आॅनलाइन का काम तो राज्य स्तर पर होना है लेकिन यह व्यवस्था तो जिला कलक्टर स्थानीय स्तर पर भी कर सकते हैं। इसमें चाहे तो किसी खुले मैदान में तंबू लगाकर भी यह काम किया जा सकता है। इससे शहर में आने वाला आम नागरिक व एंबूलैंस आदि के फंसने का खतरा नहीं रहेगा।
— वहीं सुदर्शन दुआ ने गुस्सा निकालते हुए कहा है कि ये प्रत्याशी जब अभी जनता की नहीं सोच रहे तो आगे क्या कर पाएंगें। वहीं देवाशिष अजित कुमार भट्टाचार्य व्यवस्था से नाराज लिखते हैं कि तब भी भीड लगाकर प्रचार तो होना ही है।