
आगरा। पेट्रोल की बढ़ी कीमतों सहित कई अन्य मुद्दों पर कांग्रेस ने सोमवार को भारत बंद बुलाया है। ताजनगरी में इस बार दो बार हुए भारत बंद का असर सुबह से ही दिखना शुरू हो गया था। लेकिन, कांग्रेस पार्टी के भारत बंद का असर नहीं दिखाई पड़ रहा है। सप्ताह का पहला दिन होने के चलते सड़कों पर भीड़ अच्छी खासी नजर आ रही है। कांग्रेस ने दावा किया था कि फैक्ट्री, कारखाने आदि से भारत बंद का समर्थन लिया जाएगा, लेकिन, भारत बंद बेअसर साबित होता नजर आ रहा है। आगरा क्षेत्र में भारत बंद का बेअसर दिखना कहीं न कहीं राजबब्बर के लिए अच्छा संकेत नहीं है। राजबब्बर का ये पंसदीदा क्षेत्र हैं और यहां राजबब्बर का अपना जनाधार भी माना जाता है।
दो बार हुए भारत बंद का हुआ था व्यापक असर
आगरा में दो अप्रैल और छह सितम्बर को भारत बंद हुआ था। दो अप्रैल को आगरा शहर में जबरदस्त बवाल हुआ था। कई स्थानों पर आगजनी और हंगामा हुआ था। उपद्रवियों ने जिला मुख्यालय पर कब्जा तक कर लिया था। वहीं छह सितम्बर को देहात क्षेत्र में सवर्ण और दलितों के बीच संघर्ष हुआ था। एहतियातन आगरा पुलिस ने दस सितम्बर को भी भारत बंद के लिए सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर रखी है। शहर के हर हिस्से पर पुलिस का पहरा लगा रखा है।
स्कूल किए गए बंद
भारत बंद के दौरान हुए बवाल को देखते हुए कई स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है। हालांकि मिशनरी स्कूल खुले हुए हैं। दस सितम्बर का भारत बंद का असर सिर्फ कुछ एक ही हिस्सों में देखने को मिल रहा हैं
कांग्रेस को अभी भी जनाधार की दरकार
आगरा में पिछले 28 सालों से कांग्रेस पार्टी का विधायक विधानसभा से दूर है। कांग्रेस हर बार प्रयास करती है कि 28 साल का ये सूखा समाप्त हो जाए लेकिन, कांग्रेस को निराशा और हताशा हाथ लगती है। कांग्रेस पार्टी पेट्रोल डीजल और अन्य महंगाई के मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है। लेकिन आगरा में भारत बंद बेअसर दिख रहा है।