आगरा में बेटियों ने कामयाबी का वो मुकाम हासिल किया, जिसके बाद हर कोई उनकी सराहना करता है
आगरा। उड़ने के लिए जरूरी नहीं कि पर हो, हौसलों से भी उड़ान होती है। कुछ ऐसी ही पक्तियां सटीक बैठती है इन बेटियों पर। जिन्होंने बंदिशों के बावजूद ऐसा मुकाम हासिल किया, जिससे माता पिता ही नहीं बल्कि पूरे शहर और देश गौरवांवित है।
शूटर सोनिया के जज्बे को सलाम
निशानेबाजी में नया मुकाम हासिल करने वाली दिव्यांग शूटर सोनिया शर्मा का नाम आज हर शूटर की जुबान पर है। लक्ष्य पर निशाना साधने में सोनिया का कोई सानी नहीं है। देखते ही देखते सोनिया ने सफलता को ऐसा मुकाम हासिल किया कि वे दुनियां के पांचवे नंबर की इंटरनेशनल शूटर बन गईं। अप्रैल 2018 में सोनिया ने दक्षिण कोरिया में विश्वकप में ऐसा प्रदर्शन किया जिसके बाद उन्हें आगरा ने पलकों पर बैठाया। सेंट जोंस कॉलेज से एमकॉम की छात्रा सोनिया बचपन से ही दिव्यांग हैं। उन्होंने 2015 में स्टेडियम से शूटिंग की शुरुआत की।
कुश्ती में सभी को पछाड़ा
दंगल गर्ल फिल्मों में आने के बाद मशहूर हुईं तो आगरा अछनेरा के गांव जनूथा निवासी महेन्द्र सिंह की बेटी। चौथे नम्बर की बेटी प्रियंका को महेन्द्र सिंह ने पहलवानी सिखाई और प्रियंका ने गांव के अखाड़े में पहलवानों को पटखनी देने के बाद प्रदेशस्तरीय प्रतियोगिताओं का रुख किया। उसने कई मेडल अपने नाम किए। एक बार नेशनल कुश्ती भी खेल चुकी है। प्रियंका ने कई बार प्रदेश लेवल पर कई मेडल जीते। उसके पास में बहुत सारे मेडल और सर्टिफिकेट है, जिसमें राज्यस्तरीय छह और अंतराष्ट्रीय स्तरीय एक सिल्वर मेडल है। प्रियंका देश के लिए ओलम्पिक खेलना और उसे जीतना चाहती है।
क्रिकेट का उभरता सितारा दीप्ति शर्मा
आगरा में क्रिकेट की प्रैक्टिस के दौरान जब भाई की बॉल दीप्ति के हाथ में आई तो उसने एक थ्रो में विकेट उखाड़ दिए। इसके बाद दीप्ति शर्मा को क्रिकेट खेलने के लिए उनके भाई ने प्रेरित किया। आज आगरा की ये बेटी पूरी दुनियां में अपने नाम का लोहा मनवा चुकी है। महिला विश्वकप क्रिकेट में दीप्ति ने ऐसा मुकाम हासिल किया, जो हर किसी का सपना होता है। आगरा की इस बेटी को शहरवासियों ने पलकों पर बिठाया है। बेटी दिवस पर दीप्ती शर्मा के पिता भगवनादास शर्मा का कहना है कि उनकी बेटी ने देश का नाम रोशन किया, इससे बढ़कर और क्या हो सकता है।