आगरा में इतिहासकार और अधिवक्ता परिषद के वकीलों ने ताजमहल को बताया मंदिर
आगरा। ताजमहल पर विवाद लगातार बने हुए हैं। ताजमहल शिव मंदिर है या मकबरा ये सांस्कृतिक मंत्रालय से पूछा गया है। लेकिन इसके बाद आगरा में सोमवार को स्वाध्याय मंडल ने एक प्रेसवार्ता की जिसमें लखनऊ उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन, इतिहासकार जयश्री वैद्य, इतिहासकार अशोक अठावले व अधिवक्ता परिषद के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ शामिल हुए। इतिहासकार पीएन ओक की पुत्री जयश्री वैद्य ने कहा कि हमारे धर्म, भाषा व इतिहास पर हमले हुए हैं। तमाम तथ्यों के बाद भी बार-बार ताजमहल को शाहजहां का बनाया हुआ भवन बताते हैं जबकि बादशाहनामा में इसे मंजिल संबोधित करते हुए इसे राजा जयसिंह की सम्पत्ति बताई गई है। उन्होंने कहा कि ताजमहल के सभी बंद रहस्यों को खोला जाना चाहिए।
मुमताज महल को बुरहानपुर में दफनाया था
सिंगापुर निवासी अशोक अठावले ने प्रेसवार्ता में कहा कि मुमताज महल को बुरहानपुर में दफनाया गया। ताजमहल में मौजूद चिन्ह इस बात के प्रमाण हैं कि वह हिन्दू मंदिर है। उन्होंने कहा कि मांगने पर भी एएसआई प्रमाण नहीं देता। श्रीअठावले ने कहा कि हमारा गौरवशाली इतिहास पता लगाना चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीशंकर जैन ने कहा कि उन्होने 1960 में ताजमहल के भीतर के तहखानों में जाकर हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियां देखी हैं। ताजमहल को शांहजहां ने नहीं बनवाया। उन्होंने कहा कि वामपंथियों ने इतिहास को विकृत किया। अधिवक्ता हरीशंकर जैन ने कहा कि ताजमहल में मौजूद 22 कमरों को खोल उनकी जांच करनी चाहिए।
ये हैं पूरा मामला
वर्ष 2015 में लखनऊ उच्च न्यायालय खंडपीठ के 6 अधिवक्ताओं हरिशंकर जैन, रंजना अग्निहोत्री, सुधा शर्मा, राहुल श्रीवास्तव, अखिलेंद्र कुमार द्धिवेदी, पंकज वर्मा ने ताजमहल के वर्तमान रूवरूप को चुनौती देते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन आगरा के न्यायालय में वाद सं. 365-2015 भगवान अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय आदि बनाम भारत सरकार आदि में आगरा के अधिवक्ता राजेश कुमार कुलश्रेष्ठ व अन्य अधिवक्ताओं के माध्यम से वाद योजित किया था। उक्तवाद वर्तमान में तृतीय अतिरिक्त सिविल जज सीनियर डिवीजन अभिषेक सिन्हा के न्यायालय में विचारधीन है।
अगली सुनवाई 27 सितंबर को
वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ ने बताया कि ताजमहल हिन्दू सम्पत्ति है। जिसमें हिन्दुओं को दर्शन व पूजा का पूर्ण अधिकार है तथा उक्त कार्य मंे भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय एवं भारतीय पुरातत्व विभाग को किसी भी प्रकार से हस्तक्षेप करने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी। प्रेसवार्ता में एड. गौरव जैन, उत्तम चंदेल, विवेक उपाध्याय, हमेंद्र शर्मा, धर्मेद्र वर्मा, एड. अनंत, सुभाष गिरी आदि उपस्थित रहे।